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Shahjahanpur News: ...भगवान भी सोने का हिरण ढूंढ़ रहे हैं

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पुवायां के रामलीला मैदान में देर रात तक चला कवि सम्मेलन
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संवाद न्यूज एजेंसी

पुवायां। श्री रामलीला मेला समिति पुवायां की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन का शुभारंभ राजमाता मृदुल सिंह ने मां सरस्वती और भगवान श्रीराम के चित्र समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया। कानपुर से आई अंकिता शुक्ला ने मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की।

रामलीला मेला मैदान में सेवानिवृत्त शिक्षक जमादार सिंह की अध्यक्षता में हुए कवि सम्मेलन में उज्जैन से आए नरेंद्र सिंह अकेला ने सुनाया-ये करिश्मा जमाने को दिखाने आया। वो हवाओं में चिरागों को जलाने आया। जिसने गत वर्ष कटाए थे सैकड़ों जंगल, वो मेरे गांव में एक पेड़ लगाने आया।।
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लखीमपुर के फारुख सरल ने सुनाया- जरा सी बात पर अक्सर वो हमसे रूठ जाते हैं। कभी बेबात पर वो रूठते और हम मनाते हैं। पुराना सिलसिला है रूठने का और मनाने का, जिसे वो भी निभाते हैं अभी तक हम निभाते हैं।।

बाराबंकी से आए प्रमोद पंकज ने सुनाया-जगी चौखट सचिन की और सचिन के भाग्य जागे हैं, बिना मेहनत के लड़के चार हो जाएं तो क्या कहने।

रायबरेली से आए गीतकार डॉक्टर गोविंद गजब ने सुनाया-सब प्रेम से भरा हुआ मन ढूंढ रहे हैं। पतझड़ में भी खिलता सा चमन ढूंढ रहे हैं। रखने को मान प्रेम का सब जानते हुए, भगवान भी सोने का हिरण ढूंढ़ रहे हैं।।
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कानपुर से आई अंकिता शुक्ला ने सुनाया- बिन तुम्हारे जिया ना जाएगा। जुर्म खुद पर किया ना जाएगा। बड़ा कड़वा है जुदाई का जहर, यार हमसे पिया न जाएगा।।

प्रतापगढ़ से आए हरि बहादुर हर्ष ने सुनाया- घर-घर से अफजल निकलेंगे तो हम क्या चुप धारेंगे। हम राणा के वंशज हैं हम घर में घुसकर मारेंगे।

इसके अलावा लखीमपुर के विशेष शर्मा, बरेली के मध्य सक्सेना ने भी कविता पाठ किया। कवि सम्मेलन से पहले मंच संचालन राजेश शुक्ला ने किया। मेला कमेटी के पदाधिकारी डॉ. राकेश मिश्रा, गंगाराम मिश्रा, कृष्ण कुमार गुप्ता ने सभी का आभार जताया।
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