जलालाबाद के गांव मुड़िया कलां में चुनावी चर्चा करते लोग। संवाद
जलालाबाद। मतदान की तारीख नजदीक आते ही चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। अभी तक चुप्पी साधे रहे मतदाता अब चुनावी चर्चाओं में शामिल होने लगे हैं। हालांकि, वोट को लेकर खुलकर बोलने से अब भी बच रहे हैं।
शनिवार को गांव मुड़िया कलां में चुनावी चर्चा में शामिल क्षेत्र के ज्यादातर लोग कोलाघाट का पुल और छुट्टा पशुओं को लेकर ज्यादा मुखर दिखे। चर्चा में शामिल इस गांव के कृष्ण मुरारी बोले कि केंद्र तथा प्रदेश में सरकार होने के अलावा इस जनपद के तीन मंत्री अहम मंत्रालय संभाले हुए हैं, फिर भी कोलाघाट के पुल को लेकर अभी तक कोई हल नहीं निकला है। क्षेत्र के ज्यादातर लोग इस पुल से किसी न किसी रूप से जुड़े हुए हैं।
आशाराम राठौड़ ने उनकी बात को बीच में ही काटते हुए कहा कि छुट्टा जानवरों से लोग ज्यादा परेशान हैं, मगर इसके निराकरण के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं हुए। इस बात की लोगों के अंदर टीस है। पास के ही गांव दियूरनिया निवासी सूरज का कहना था कि गांव तक सड़क, गुंडागर्दी पर लगाम और हर माह मिलने वाले राशन की बेहतर व्यवस्था के आगे ज्यादातर लोग अन्य समस्यायों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
अभिषेक मिश्रा ने भी उनकी बात का समर्थन किया और बोले कि आम आदमी को बेहतर माहौल मिला है और ज्यादातर लोग इससे खुश हैं। इंद्रपाल ने कहा कि महंगाई और भ्रष्टाचार बढ़ा है, जिससे आम आदमी परेशान है। इस चुनाव में यह बड़ा मुद्दा है। रघुवीर और हरिपाल इस बात पर एकमत दिखे कि जनप्रतिनिधि को जनता के बीच आकर उनकी समस्याओं को समझकर निराकरण कराना चाहिए। जब तक सरकार तक बात नहीं पहुंचेगी, उसका निराकरण कैसे होगा। राकेश ने भी उनकी बात का समर्थन किया, बोले सरकार बेहतर ढंग से कार्य कर रही है लेकिन स्थानीय प्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र में लोगों से नहीं मिलते।