शाहजहांपुर। डिप्थीरिया रोग ने तेजी पकड़ ली है। यह बच्चों के साथ बड़ों को भी जकड़ने लगा है। रोगियों की संख्या में इजाफा होने के कारण वार्ड में बेडों की संख्या बढ़ा दी है। अगस्त के बाद बुधवार को डिप्थीरिया संभावित दूसरे बच्चे की मौत के बाद बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़ा होने लगा है। जिले में अभी तक 19 बच्चों में डिप्थीरिया के लक्षण मिल चुके हैं। अमूमन 15 दिन में रिपोर्ट आने से डिप्थीरिया की पुष्टि होती है। डिप्थीरिया संक्रामक रोग है। यह कोराइन बैक्टीरियम डिप्थीरिया के कारण होता है जो मुख्यत: गले और ऊपरी वायुमार्ग को संक्रमित करता है और टॉक्सिन एवं अन्य अंगों को प्रभावित करता है। दूसरे प्रकार का डिप्थीरिया गले और कभी-कभी टॉन्सिल को प्रभावित करता है।
एक अगस्त को डिप्थीरिया संभावित तीन बच्चे मिले थे। तब राजकीय मेडिकल कॉलेज में तीन बेड का वार्ड बना दिया गया था। दस सितंबर के बाद डिप्थीरिया संभावित मरीज तेजी से बढ़े हैं। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. पीपी श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में डिप्थीरिया संभावित 19 रोगी सामने आ चुके हैं। जहां भी रोगी मिले हैं वहां पर विशेष टीकाकरण अभियान चलाकर बच्चों को टीके लगाए गए हैं।
लखनऊ से मंगाए जा रहे इंजेक्शन
अस्पताल में भर्ती होने वाले डिप्थीरिया संभावित मरीजों का इलाज डॉक्टरों की निगरानी में होता है। भले ही रिपोर्ट आने में समय लगता है, लेकिन मेडिकल स्टाफ उन्हें डिप्थीरिया का मरीज मानकर ही उपचार देता है। नोडल अधिकारी ने बताया कि मरीजों के लिए एंटी डिप्थीरिया सीरम लखनऊ से मंगाया जा रहा है। आमतौर पर यह रोग एंटीबायोटिक लेने के 48 घंटे के बाद संक्रामक नहीं होता है।
ये बरतें सावधानी
डिप्थीरिया संक्रामक बीमारी है। इसके बैक्टीरिया मरीज के मुंह, नाक और गले में रहते हैं ।
डिप्थीरिया एक व्यक्ति से दूसरे में खांसने और छींकने से फैलता है ।
बारिश के मौसम में इसके जीवाणु सबसे अधिक फैलते हैं।
दो से तीन दिन के भीतर गले में खराश, हल्का बुखार और गर्दन की ग्रंथियों में सूजन आना।
सांस लेने व खाना निगलने में समस्या होती है
बचाव
डिप्थीरिया से एंटीबायोटिक दवाओं व टीकों से बचा जा सकता है ।
आमतौर पर काली खांसी और टिटनेस के टीके के साथ दिया जाता है। यह टीका पांच खुराकों में भिन्न-भिन्न आयुवर्ग के बच्चों को दिया जाता है ।
सबसे पहले दो महीने, फिर चार महीने एवं छह महीने, उसके बाद 15 महीने से 18 महीने तक और फिर चार साल से छह साल तक के बच्चों को टीका लगाया जाता है।
- अभी तक 19 डिप्थीरिया संभावित केस सामने आए हैं। उनकी रिपोर्ट आने का इंतजार किए बिना इलाज शुरू कर दिया जाता है। मरीजों के गांवों में टीकाकरण कराया गया है। - डॉ. पीपी श्रीवास्तव, नोडल अधिकारी