शाहजहांपुर। सांसद अरुण कुमार सागर ने संसद में नियम 377 के अधीन सूचना के तहत अपने संसदीय क्षेत्र के आलू उत्पादकों समेत अन्य किसानों को फसलों का लाभकारी मूल्य नहीं मिलने और उनके आर्थिक संकट से जूझने की समस्या से अवगत कराया। उन्होंने जिले में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित कराने और आलू निर्यात के लिए सरकार से उचित कदम उठाये जाने की मांग की है। यही नहीं, उन्होंने इस तरह के उद्योगों की जनपद में अनुकूलताओं और संभावनाओं पर भी संसद का ध्यानाकर्षण किया।
लखनऊ में गत माह हुई ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट के समानांतर जनपद में आयोजित निवेश कुंभ में भी इस बिंदु पर निवेशकोंं के मध्य जन प्रतिनिधियों ने प्रमुखता से चर्चा की थी। जलालाबाद के विधायक हरिप्रकाश वर्मा ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में आलू की भारी पैदावार और तमाम खाली पड़ी जमीनों का उल्लेख कर वहां आलू प्रसंस्करण समेत अन्य कृषि उत्पादों पर आधारित उद्योग स्थापित करने की तजरूरत बताई थी। यही नहीं, इसी मौके पर एमएलसी डॉ. सुधीर गुप्ता ने कृषि में अग्रणी पुवायां तहसील क्षेत्र में ऐसे उद्योगों की संभावनाओं के बारे में निवेशकों से चर्चा की थी।
चूंकि, जिले में आलू का रकबा गत तीन वर्ष से बढ़ रहा है। इसलिए सांसद ने संसद के पटल पर अपनी बात रखते हुए कहा कि उनके संसदीय क्षेत्र की तिलहर, सदर, पुवायां, जलालाबाद और कलान तहसीलों में आलू की काफी अधिक फसल होती है। क्षेत्र के किसानों की जीविका का एकमात्र सहारा आलू की उपज ही है, लेकिन वर्तमान समय में लागत मूल्य से भी आदि कम पर आलू बिक रहा है। जिस कारण क्षेत्र के किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। आलू आधारित फूड प्रोसेसिंग उद्योग स्थापित किए जाने से किसानों को काफी राहत मिलेगी।