शाहजहांपुर। जलालाबाद, कलान और तिलहर में हजारों बीघा फसलें पानी में डूबी होने से किसान परेशान हैं। कई गांवों के संपर्क मार्गों से बाढ़ का पानी हटने के बाद दुर्दशा भी दिखने लगी है।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार कलान के भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर बीते 24 घंटे से स्थिर है, जबकि रामगंगा के जलस्तर में दस सेमी, गर्रा में 75 सेमी और खन्नौत के जलस्तर में 80 सेमी की गिरावट आई है। हालांकि, कुछ बैराजों से रामगंगा में पानी की निकासी 3516 क्यूसेक बढ़ाकर 8600 क्यूसेक कर दी गई है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इससे रामगंगा के जलस्तर में कोई खास वृद्धि होने की संभावना नहीं है।
सिंचाई विभाग शारदा नहर खंड के अधिशासी अभियंता सुनील कुमार भास्कर ने बताया कि खो बैराज, ढेला बैराज और फीका बैराज से रामगंगा में बुधवार सुबह पानी की निकासी थोड़ी बढ़ी है, लेकिन इससे जलस्तर यथावत रहने या फिर उसमें कमी आ सकती है।
नदियों का जलस्तर (मीटर में) : एक नजर
नदी खतरे का निशान मौजूदा जलस्तर जलस्तर में वृद्धि/कमी
गंगा 143.65 142.25 स्थिर
रामगंगा 161.50 159.91 - 0.10
गर्रा 148.80 146.70 - 0.75
खन्नौत 145.75 144.05 - 0.80
फसली नुकसान का सर्वे नहीं होने से किसान परेशान
जलालाबाद। बाढ़ से मूंगफली और मक्का की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने फसल बीमा का लाभ दिलाने को सर्वे अभी तक शुरू नहीं कराया है। बीते साल इन दोनों फसलों की अच्छी पैदावार और रेट मिलने से क्षेत्र के किसानों ने इस बार लगभग 400 हेक्टेयर में मूंगफली 150 हेक्टेयर में मक्का बोई थी। लगातार कई दिन हुई बारिश से तैयार फसल खराब हो गई। नदियों के तटवर्ती गांवों के खेतों में बाढ़ का पानी भरने से फसलों को 80 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान होने का अनुमान है। जो फसल बच गई, वह खराब होने के कारण औने-पौने दामों पर बिकी और काश्तकारों की लागत भी नही निकल पाई। कई निचले इलाके के खेतों में अभी तक पानी भरा है। तहसीलदार पैगाम हैदर ने बताया कि अभी क्षेत्र में कई जगह खेतों में पानी भरा है। उनका कहना है कि खेतों से पानी निकलने के बाद सर्वे कराया जाएगा। नुकसान के हिसाब से मुआवजा मिलेगा। संवाद
भूमि कटान और फसली नुकसान की किसानों पर दोहरी मार
परौर। रामगंगा की बाढ़ कम होने के बाद अन्नदाता भूमि के कटान और फसली नुकसान की दोहरी मार झेलने को विवश हैं। मोहनपुर, दहेलिया और नारायण नगर के पश्चिम में रामगंगा से भूमि कटान बुधवार को भी जारी रहा। बता दें कि बीते एक दशक में यहां के विभिन्न गांवों में रहने वाले 15 से ज्यादा किसान परिवारों की जमीनें रामगंगा में समा चुकी हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग को दो वर्ष पहले अस्थायी ठोकरों के तौर पर लगाए गए बालू से भरे जिओ ट्यूब फट जाने और उसी स्थान पर कटान होने की जानकारी दी, लेकिन कटान के हालात जानने कोई अधिकारी अथवा कर्मचारी नहीं आया। मोहनपुर और नारायणनगर के किसान रामगंगा में खेत डूबे होने से धान, मूंगफली और मेंथा आदि फसलें खराब होने से परेशान हैं।
मैंने आठ बीघा शिवाला (मेंथा) लगाया था, लेकिन एक हफ्ता तक रामगंगा का पानी खेत में घुसा रहा। इससे फसल चौपट होने से करीब 50 हजार रुपये का घाटा हो गया।
-बृजेश कुमार कुशवाहा, हैदलपुर
दो एकड़ मूंगफली बोई थी। एक एकड़ मूंगफली खोदी जा सकी, लेकिन तब तक रामगंगा में बाढ़ आ गई। एक एकड़ मूंगफली खराब हो गई, जबकि बैंक से लोन लेकर फसल में लागत लगाई थी।
-सेठपाल सिंह कुशवाहा, हैदलपुर
परौर से रामगंगा कटान की खबर में, बृजेश कुशवाहा। संवाद
परौर से रामगंगा कटान की खबर में, बृजेश कुशवाहा। संवाद