सात वर्ष की मासूम से दुष्कर्म और छोटी बहन की क्रूरतापूर्वक हत्या के 57 माह पुराने मामले में दोषी अनिल उर्फ चमेली को अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अपने फैसले में केस को विरलतम श्रेणी का मानते हुए कहा कि दोषी को मृत्युदंड दिया जाना ही न्यायोचित होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो समाज में गलत संदेश जाएगा और न्यायिक प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न उठेगा।
कांट थाना क्षेत्र के एक गांव में पांच और सात साल की सगी बहनें 22 फरवरी 2021 को दोपहर करीब साढ़े तीन बजे प्राथमिक विद्यालय में लगे नल पर नहाने गई थीं। शाम तक दोनों नहीं लौटीं तो परिजनों को चिंता हुई। वे लोग बच्चियों को तलाशते रहे। शाम को गांव से बाहर खेत पर पांच वर्ष की बच्ची मृत अवस्था में मिली। उसके सिर से खून बह रहा था।
दूसरी बहन की तलाश शुरू की तो रात करीब 11 बजे घटनास्थल से लगभग सौ मीटर की दूरी पर बच्ची लहूलुहान हालत में पड़ी मिली। उसकी सांसें चल रही थीं। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बच्ची को राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। इसके बाद उसे बरेली के एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया।
पुलिस ने इस मामले में बच्चियों के दादा की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। पुलिस की विवेचना में अजीजगंज में जिला अस्पताल के पीछे रहने वाले अनिल उर्फ चमेली का नाम सामने आया। वारदात के दिन गांव वालों ने बच्चियों को उसके साथ जाते देखा था। अनिल मधुमक्खियों के छत्ते तोड़कर शहद निकालने के लिए गांव में अक्सर आता-जाता रहता था।
पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो अनिल ने बताया कि वह बच्चियों को बिस्कुट देने के बाद शहद खिलाने का लालच देकर उन्हें गांव के बाहर खेत पर ले गया था। उसने बड़ी बहन से दुष्कर्म किया और शहद तोड़ने में इस्तेमाल होने वाली लोहे की खंती से उसके सिर पर वार कर दिया।उसके चीखने-चिल्लाने पर छोटी बहन गांव की ओर भागने लगी। पकड़े जाने के डर से उसने सौ मीटर आगे उसे पकड़ लिया और सीने पर बैठकर खंती से ही उसके सिर पर भी कई वार किए। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। दोनों बहनों को मरा समझकर वह भाग गया था।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर अनिल के खिलाफ दो अप्रैल 2021 को आरोपपत्र अदालत भेजा। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) मनोज कुमार सिद्धू ने केस को विरलतम श्रेणी का मानते हुए अनिल को मृत्युदंड से दंडित किया। अदालत ने कहा कि मृत्युदंड के लिए अनिल उर्फ चमेली की गर्दन में फंदा डालकर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए। उस पर 1,37,500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।