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मावा में हो रही स्वास्थ्य के लिए घातक फॉरेन फैट की मिलावट

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शाहजहांपुर। अभी तक जिलेेे में मावा में स्टार्च युक्त पदार्थों की मिलावट के मामले पाए जा रहे थे, अब धंधेबाजों ने उसमें शरीर के लिए असुरक्षित तत्वों का घालमेल शुरू कर दिया है। केरूगंज मंडी से लिए गए मावा के नमूने में फॉरेन फैट (विजातीय वसा) की मिलावट पाई गई है। जांच में नमूना स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित बताए जाने पर अब इस मामले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) मुकदमा दायर करने जा रहा है।
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मावा का यह नमूना 13 अगस्त को केरूगंज क्षेत्र के मोहल्ला रंगमहला की खोया मंडी से खाद्य सुरक्षा अधिकारी इंद्रराज मौर्य ने ग्रामीण क्षेत्र से आए एक विक्रेता से लिया था। जांच रिपोर्ट में स्टार्च युक्त पदार्थ (आलू, अरारोट, मैदा आदि) मिले होने की पुष्टि की गई। साथ ही रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि स्टार्च की बीआर (ब्यूटायरो रिफ्रेक्टर) रीडिंग अधिक पाई गई है। एफएसडीए के अभिहीत अधिकारी विजय कुमार वर्मा ने बताया कि बीआर रीडिंग अधिक आने का तात्पर्य यह है कि मावा में दूध के बजाय किसी अन्य बाहरी स्रोत के वसा की मिलावट की गई है। यह वसा वनस्पति के अलावा किसी पशु की भी हो सकती है।
अभिहीत अधिकारी के अनुसार मावा में विजातीय वसा मिलाने से ही नमूना अनसेफ श्रेणी में माना गया है। उन्होंने संबंधित विक्रेता द्वारा नमूना लेते वक्त बताए गए नाम-पते की पुष्टि के लिए संबंधित एफएसओ को मौके पर भेजा गया है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद विक्रेता के खिलाफ एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा दायर किया जाएगा। मुकदमे में आरोप सिद्ध होने पर विक्रेता को कारावास की सजा के साथ अधिकतम पांच लाख रुपये जुर्माना देना पड़ सकता है।
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फेल हुए दो अन्य नमूनों में भी मिलीं खामियां
अभिहीत अधिकारी ने बताया कि दो दिन पहले राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला से विभिन्न खाद्य वस्तुओं के 24 नमूनों की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई, जिनमें दो अन्य नमूने भी विभिन्न कमियों के कारण फेल हो गए। तिलहर के मोहल्ला निजामगंज निवासी धर्मपाल से 31 अक्तूबर 2021 को लिया गया दूध का नमूना मिश्रित पाया गया। इसमें पानी की मिलावट होने से मिल्क फैट और एसएनएफ (सॉलिड नॉट फैट) मानक कम पाया गया। इसी तरह जलालाबाद में खंडहर रोड स्थित खोया मंडी से बांसखेड़ा निवासी जगवीर से 14 मार्च को लिए मावा के नमूने में मिल्क फैट मानक से कम पाए जाने के कारण उसे भी अधोमानक पाया। इन दोनों मामलों में विक्रेताओं के खिलाफ विभाग के न्याय निर्णायक अधिकारी/एडीएम प्रशासन कोर्ट में मुकदमे दर्ज होंगे और विक्रेताओं पर अधिकतम दो लाख रुपये जुर्माना हो सकता है।
संदिग्ध वसा से पाचन तंत्र होगा खराब
दूध में प्राकृतिक वसा होती है और वही मावा में भी होनी चाहिए। वसा युक्त पदार्थ पेट में पचने में समय लेते हैं, लेकिन एनिमल फैट (पशु का वसा) जल्दी हजम नहीं होता और पाचन तंत्र को गंभीर क्षति पहुंचा सकता है। ऐसे वसायुक्त दूध अथवा मिठाई का सेवन करने से आमाशय, लिवर, आंत आदि को क्षति पहुंच सकती है। ये दिक्कतें पैदा होने पर भूख भी कम हो सकती है। जहां तक संभव हो, मिठाई खाने का शौक पूरा करने के लिए लोग विश्वसनीय दुकान से दूध खरीद कर घर पर ही मावा तैयार करें। - डॉ. एमएल अग्रवाल, वरिष्ठ फिजीशियन, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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