शाहजहांपुर। तेज धूप के साथ गर्म हवा के थपेड़ों की वजह से लू लगने का खतरा मंडराने लगा है। स्वास्थ्य विभाग ने सीएचसी-पीएचसी पर शीतल कक्ष को दुरुस्त करते हुए रैपिड रिस्पांस टीम को सक्रिय कर दिया है। डॉक्टरों की मानें तो अभी तक लू से पीड़ित कोई मरीज नहीं पहुंचा है।
मई में मौसम गर्म होने के साथ लोगों को वायरल बुखार और डायरिया ने घेरना शुरू कर दिया था। सरकारी व निजी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ उमड़ने लगी। आने वाले समय में मौसम ज्यादा गर्म होने पर लू से पीड़ित मरीजों को राहत देने के लिए स्वास्थ्य इकाइयों पर शीतल कक्ष में पंखे-कूलर की व्यवस्था कराई गई। मरीजों के लिए दवाओं का इंतजाम करने के साथ फ्लूड, ओआरएस का इंतजाम किया है।
इधर, पूर्व में गठित 15 रैपिड रिस्पांस टीमों को सक्रिय कर दिया है। सीएमओ ने निर्देशित किया कि कहीं से लू से पीड़ित मरीज की सूचना मिलने पर तुरंत उसे एंबुलेंस से लाकर उपचार किया जाए।
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सामान्य एंटीबायोटिक से कंट्रोल नहीं हो रहा डायरिया
-राजकीय मेडिकल कॉलेज में वायरल बुखार व डायरिया से पीड़ित मरीजों की भरमार है। बृहस्पतिवार को 1699 नए लोगों ने पर्चा बनवाने के बाद दवा ली। इनमें 50 प्रतिशत मेडिसिन विभाग में पहुंचे। फिजिशियन डाॅ.सुप्रिया ने बताया कि सामान्य एंटीबायोटिक से बुखार व डायरिया कंट्रोल नहीं हो रहा। इसके लिए डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। आईबी फ्लूड, एंटी वायरल दवा के जरिये तीन से चार दिन में मरीजों को फायदा हो रहा है। उन्होंने मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खाने के बजाय अस्पताल में दिखाने पर जोर दिया।
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राजकीय मेडिकल काॅलेज में बेड फुल
-राजकीय मेडिकल कॉलेज में बेड को लेकर मारामारी मच गई है। मरीजों की अधिकता के चलते बेड फुल हो गए हैं। सीएमएस डॉ.नेपाल सिंह ने बताया कि अस्पताल की क्षमता 330 बेड की है। अतिरिक्त बेड डलवाने के बाद भी बुधवार की रात 450 मरीज अस्पताल में भर्ती थे।
-लू से बचाव के लिए चिकित्सा अधिकारियों को सक्रिय कर दिया है। शीतल कक्ष बनाकर दवाओं का इंतजाम किया है। एसीएमओ के साथ खुद भी निरीक्षण कर व्यवस्थाएं देख रहे हैं।
डॉ.आरके गौतम, सीएमओ
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लू से ऐसे करें बचाव
-हल्के रंग के ढीले व आरामदायक कपड़े पहने।
-सिर को ढककर निकलें, कैप व छाते का उपयोग करें।
-धूप से बचाव के लिए चश्मा लगाएं
-थोड़े समय के अंतराल पर तरल पदार्थ पीते रहे।
-शिकंजी, नारियल पानी, छाछ, ओआरएस घोल आदि पीएं।
-तेज धूप व गर्म हवा के सीधे संपर्क में आने से बचे।
-बेहद जरूरी होने पर ही दोपहर 12 से चार बजे के बीच घर से निकलें।