शाहजहांपुर। ददरौल विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में सपा और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है। मुकाबले का परिणाम तो चार जून को ईवीएम से बाहर आएगा, लेकिन माना जा रहा है कि टक्कर कांटे की हुई है। वोटों का ध्रुवीकरण यहां पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
भाजपा ने दिवंगत विधायक मानवेंद्र सिंह के बेटे अरविंद सिंह को चुनाव मैदान में उतारा था। सपा से पूर्व राज्यमंत्री अवधेश वर्मा चुनाव लड़ रहे थे। इस सीट से सपा के दिग्गज नेता माने जाने वाले राममूर्ति सिंह वर्मा ने 2012 में जीत दर्ज की थी। लोध वोटर यहां पर निर्णायक भूमिका में हैं। यादव और मुस्लिम वोटों के साथ अगर लोध वोट एकमुश्त अवधेश वर्मा को मिला तो उनकी राह आसान हो सकती है। यहां पर जिले में सबसे अधिक 58.66 प्रतिशत मतदान हुआ है। ऐसे में माना जा रहा है कि वोटों का ध्रुवीकरण भी हुआ है। अगर ध्रुवीकरण होता है तो भाजपा को लाभ मिलेगा।
अरविंद सिंह अपने पिता मानवेंद्र सिंह की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। मानवेंद्र सिंह पीडब्ल्यूडी मंत्री जितिन प्रसाद के करीबी माने जाते थे। अरविंद के समर्थन में भी जितिन ने जनसभा की थी। क्षेत्र में सड़कों का जाल भी बिछाया गया है। कांट में ब्राह्मण वोट भी अच्छी-खासी संख्या में है। ऐसे में सवर्ण वोटों के साथ ही अनुसूचित जाति और पिछड़ा वोट बैंक में सेंध लगाकर अरविंद सिंह मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। कांट कस्बे और आसपास के गांवों में मतदाता बूथों पर मुस्लिम मतदाताओं की लंबी कतारें सपा को फायदा पहुंचा सकती हैं। यहां पर बसपा प्रत्याशी सर्वेश चंद्र मिश्रा ब्राह्मण वोटों को काटेंगे। उनके साथ पार्टी का कैडर वोट भी है। वह मजबूती से चुनाव लड़े थे। हालांकि क्षत्रिय वोट अरविंद को एकमुश्त मिलने की संभावना है। अगर ध्रुवीकरण हुआ तो अरविंद को फायदा मिलेगा।