शाहजहांपुर। जिले में फसलों की सिंचाई के लिए नहरों का जाल बिछा हुआ है। हर साल नहरों की सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। इस साल भी हुए पर काम सिर्फ कागजों में हुआ। छोटी नहरों की सफाई और उनके रखरखाव पर तो ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है। सिल्ट जमा होने से नहरें उफना रही हैं। पानी आसपास के खेतों और सड़कों पर भर रहा है। ददरौल क्षेत्र में चांदापुर नहर का पानी फसलों के साथ ही स्कूल में भर गया है।
जिले की तीन लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई को छोटी-बड़ी 121 नहरें हैं। इनमें शारदा नहर खंड की 80, राष्ट्रीय जल प्रबंध योजना की 36, नलकूप खंड की तीन और शारदा सागर खंड (लखीमपुर खीरी) की दो नहरें शामिल हैं। जिले में नहरों की लंबाई करीब 600 किमी है। विभागीय अभियंताओं के अनुसार नहरों की सिल्ट सफाई पर प्रति किमी लगभग 30 से 35 हजार रुपये खर्च होते हैं। हर साल नहरों की सफाई पर दो करोड़ रुपये का बजट जारी होता है, लेकिन इस वर्ष कई नहरों की सिल्ट सफाई नहीं होने से उनमें पानी ओवरफ्लो हो रहा है।
ददरौल क्षेत्र में अक्सर उफनाती है नहर
ददरौल। लखनऊ-दिल्ली हाईवे के टोल प्लाजा से रुद्रपुर, बिजलापुर, कारीनौशारा और सरौरा से चौहनापुर तक 30 किमी लंबी नलकूप खंड की नहर को अजीजगंज डाम से भी जोड़ा गया है। इस बार भी नहर की सफाई चांदापुर गांव तक कराई गई, लेकिन वहां से चौहनापुर तक 15 किमी हिस्से में वर्षों से सफाई न होने के कारण कासिमगंज गांव के आगे नहर में झाड़ियां उग आई हैं। पानी चांदापुर गांव से आगे नहीं बढ़ने पर पटरियों के ऊपर से बहने लगता है। बरेग गांव के पास 300 बीघा गेहूं समेत रबी की फसलें डूब चुकी हैं।
नहर में उग आई घास और झाड़ियां
मीरानपुर कटरा। नगर सहित आसपास गांवों के किसान शारदा नहर के अलावा उससे निकलने वाले तिलहर रजबहा, सैदापुर रजबहा, रमापुर माइनर, उखली माइनर, सालपुर माइनर आदि से फसलों की सिंचाई करते हैं। पिछले काफी दिनों से इन नहरों की सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिए जाने से उनमें लंबी घास और झाड़ियां उग आई हैं। इस कारण पानी आने पर उथली नहरें उफनाकर फसलों का नुकसान करती हैं, जबकि नहरों के अंतिम छोर वाले खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है।
जैतीपुर में नहर पटरी पर हुए अवैध कब्जे
जैतीपुर। क्षेत्र में कटरा की शारदा नहर और बरेली के रजबहा से निकली दो माइनरें करीब 50 गांवों की फसलों को सींचने के काम आती रहीं। करीब 13 किमी लंबी शारदा माइनर ताहरपुर, खेड़ा रठ, बझेड़ा भगवानपुर, नौगवां, गोहावर, विक्रमपुर और शिकारपुर होकर बहगुल नदी में मिलती है। इस नहर की सफाई हो चुकी है, लेकिन बरेली रजबहा की सफाई नहीं कराई गई। जगह-जगह कुलाबे कटने और नालियां गायब होने के साथ नहर पटरियों पर अवैध कब्जे हो गए हैं। इस कारण खमरिया, धीमरपुरा, बमियाना, पलिहुरा, करकौर, खिरिया, जुझारपुर, कटहा, बैसरा बैसरी, गोरा बकैनियां आदि गांवों के किसान नलकूप से महंगी सिंचाई करने को मजबूर हैं।
वर्जन
जिले की सभी छोटी-बड़ी नहरों की हर साल दिसंबर माह में एक साथ सिल्ट सफाई कराई जाती है। इसमें बड़ी नहरों को प्राथमिकता दी जाती है। शारदा नहर खंड की यहां से नियंत्रित होने वाली नहरों का जाल शाहजहांपुर के अलावा पीलीभीत, बरेली और हरदोई तक फैला है। नहर खंड की 80 नहरों की सिल्ट सफाई को इस वर्ष 2.18 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। सफाई का काम पूरा हो चुका है, लेकिन अभी स्वीकृत बजट की आधी धनराशि मिल सकी है। ग्रामीण क्षेत्र की माइनरों सर्वे कराकर उनकी कमियां दूर कराई जाएंगी। - सुनील भास्कर, अधिशासी अभियंता, शारदा नहर खंड