जिले में पिछले 24 घंटे के दौरान फसली नुकसान से परेशान चार किसानों की मौत हो गई। फसल की बर्बादी सहन नहीं कर पाने से बंडा क्षेत्र के लिलहर गांव में 70 वर्षीय नंदलाल ने खेत के पास बाग में और खुदागंज क्षेत्र के गांव बखौरा निवासी 60 वर्षीय बृजेंद्र सिंह ने खेत पर पड़े छप्पर से रस्सी बांधकर फांसी लगा ली। उधर, मदनापुर क्षेत्र के ककरौआ गांव में 40 वर्षीय रतीराम और जलालाबाद क्षेत्र के गुरगवां गांव में 55 वर्षीय मुनेश्वर सिंह की खेत पर हालत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। इन्हें मिलाकर जिले में अब तक नुकसान से प्रभावित 63 किसानों की अस्वाभाविक मौत हो चुकी है।
केस-एक
बाग में जाकर फांसी पर झूल गए नंदलाल
पुवायां। बंडा क्षेत्र के गांव लिलहर निवासी किसान नंदलाल ने छह बीघा खेत में गेहूं बोया था। फसल की बुवाई के लिए लोगों से कर्ज भी लिया था। रविवार को फसल कटने पर सिर्फ छह क्विंटल गेहूं निकले। इतने गेहूं से कर्ज की अदायगी नहीं होते देख वह परेशान हो उठे। गमगीन मन से खाना खाए बगैर बिस्तर पर लेट गए। देर रात किसी समय नंदलाल घर से बाहर निकल गए और खेत के पास बाग में एक पेड़ की डाल से गमछा बांधकर फांसी लगा ली। सुबह घरवालों के तलाश करने पर उनका शव फांसी पर लटका मिला। शव के साथ पोस्टमार्टम हाउस पर आए उनके भतीजे राम किशोर ने बताया कि नंदलाल अविवाहित थे और कर्ज चुकाने के बारे में रविवार को देर तक चिंता जाहिर करते रहे। कोई रास्ता नहीं सूझा तो फांसी लगा ली।
केस-दो
खेत पर फांसी लगाकर बृजेंद्र ने दे दी जान
खुदागंज। क्षेत्र के गांव बखौरा निवासी बृजेंद्र सिंह डेढ़ एकड़ खेत में गेहूं की बर्बादी से पिछले एक सप्ताह से परेशान थे। बीती 22 अप्रैल को बेटी रचना की शादी की थी और उसमें भी उन्हें गांव के कुछ लोगोें से कर्ज लिया था। फसल खराब होने के दुख और कर्ज के बोझ से परेशान होकर कोई रास्ता नहीं सूझा तो खेत पर ही फसल की रखवाली के लिए डाली गई झोपड़ी में रस्सी बांधकर फांसी लगा ली। उनकी अचानक मौत से पत्नी विमला का रोते-रोते बुरा हाल हो गया। वह अपने पीछे दो अविवाहित बेटियां और तीन बेटे छोड़ गए हैं।
केस-तीन
फसल बर्बाद देख रतीराम की थम गईं सांसें
मदनापुर। क्षेत्र के गांव ककरौआ निवासी रतीराम ने रविवार शाम दस बीघा फसल की गहाई कराई, लेकिन फसल अनुमान की तिहाई भी नहीं निकली। फसली नुकसान देख खेत पर ही हालत बिगड़ गई और गश खाकर गिर पड़े। परिवार के लोग उन्हें जैसे-तैसे घर लाए, लेकिन देर रात उनकी सांसें थम गईं। शव के साथ पोस्टमार्टम हाउस पर आए रतीराम के रिश्तेदार रवींद्र कुमार के अनुसार वह अपने पीछे पत्नी राममूर्ति सहित तीन अविवाहित बेटियां और दो छोटे बेटे छोड़ गए हैं।
केस-चार
इलाज से पहले स्वर्ग सिधार गए मुनीश्वर
जलालाबाद। सोमवार सुबह फसली नुकसान से आहत क्षेत्र के गांव गुरगवां के पूर्व प्रधान मुनीश्वर सिंह की मौत हो गई। उन्होंने सुबह 35 बीघा खेत में बोई फसल की गहाई कराई तो सिर्फ 17 क्विंटल गेहूं देख उन्हें गहरा आघात लगा। वह घर में आकर चारपाई पर लेट गए। कुछ देर बाद तबियत बिगड़ने पर जब उन्होंने अपने बड़े बेटे कल्लू को बुलाया तब उनकी तबियत खराब होने का पता लगा। घरवाले जब तक दवा आदि का इंतजाम करते, मुनीश्वर की सांसें थम गईं। कल्लू के अनुसार उनके पिता पर गांव के ही लोगों का करीब दो लाख का कर्ज था जिसको निपटाने के लिये वह पहले से ही परेशान थे। मृतक के परिवार में पत्नी जलधारा के अलावा दो लड़के कल्लू और देवेंद्र हैं।
65764 किसानों को मिले 23.85 करोड़
फसली नुकसान से जिले के प्रभावित किसानों को अब तक 23.85 करोड़ रुपये की सहायता के चेक बांटे जा चुके हैं। डीएम ने बताया कि सोमवार को पुवायां तहसील में 813 किसानों को 37.37 लाख रुपये, सदर तहसील में 962 किसानों को 34.52 लाख रुपये, तिलहर में 659 किसानों को 8.50 लाख रुपये और जलालाबाद तहसील में 1236 किसानों को 32.46 लाख रुपये के चेक वितरित कराए गए।