रोडियोग्राफी कैमरा चोरी होने से प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। प्लांट कैंपस में हाई सिक्योरिटी के कारण सुरक्षा कर्मियों की मिलीभगत के बिना प्लांट से बाहर नहीं निकल सकता हैं। पुलिस की जांच इसी बिंदु पर टिकी है। पुलिस ने बुधवार को कैमरे के आसपास और गेेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों से भी बातचीत की। प्लांट की चहारदीवारी भी चेक की गई। वजह, इससे पहले प्लांट कैंपस से कई बार स्क्रैप चोरी हो चुका है। इसमें चोर चहारदीवारी के नीचे सुरंग बनाकर स्क्रैप चोरी कर चुके हैं। चहारदीवारी में कोई सेंध या सुरंग नहीं मिली। प्लांट के अधिकारियों का कहना है कि रेडियोग्राफी कैमरे से सामान्य तस्वीरें खींचना संभव नहीें है। इसलिए जांच को कैमरा चुराने के उद्देश्य पर फोकस किया गया है।
यूनिट की ओवरहालिंग के समय आता था कैमरा
प्लांट को रेडियोग्राफी कैमरा भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने मुंबई के भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र से उपलब्ध कराया था। प्लांट का मेंटीनेंस देखने वाली नागपुर की बैकुरल एनडीटी कंपनी कैमरे को यूनिट की ओवरहॉलिंग के समय यहां लाती थी। 29 जनवरी को कैमरे को एक यूनिट की ओवरहालिंग के लिए लाया गया था। कैमरे की कीमत तीन से पांच लाख रुपये के बीच बताई जा रही है।
गोपनीय जांच करा रहा परियोजना प्रबंधन
‘मामला संवेदनशील होने के कारण गोपनीय जांच कराई जा रही है। कैमरा चोरी में प्लांट के किसी कर्मचारी का हाथ पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।’
- धर्मेंद्र सिंह, जीएम, एचआर, पावर प्लांट
सुरक्षा कर्मियों की मिलीभगत का अंदेशा
‘सिक्योरिटी की मिलीभगत के बगैर कैमरा प्लांट से बाहर नहीं निकल सकता है। इसी बिंदु पर सुरक्षा में लगे लोगों से पूछताछ की जा रही है। ग्वारी गांव के लोगों से भी पूछताछ की गई है।’
-नरेंद्र देव पाठक, इंस्पेक्टर, थाना आरसी मिशन