रविवार रात घर जाते समय गांव गुलौली के सेवा से सेवानिवृत्त हवलदार 75 वर्षीय दिलीप सिंह की घर से थोड़ी ही दूरी पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। एक गोली पीठ और एक कनपटी के पास लगने से उनकी मृत्यु हो गई। परिवार के लोगों से किसी से भी रंजिश से इंकार किया है।
दिलीप सिंह रविवार को घर से साइकिल लेकर गांव नाहिल आए थे। नाहिल में साइकिल रखने के बाद वह पुवायां पहुंचे। शाम को वापस घर जाते समय उन्होंने रास्ते में रूककर काफी देर तक बच्चों को क्रिकेट खेलते देखा। उसके बाद वह साइकिल से घर चले तो रास्ते में हत्यारों ने उन्हें दो गाली मारकर मौत के घाट उतार दिया। दिलीप सिंह का रिश्तेदार गावं गुलौली का ही रहने वाला बलजीत सिंह दवा लेने के लिए निकला तो रास्ते में दिलीप सिंह का शव पड़ा देख परिवार के लोगों को घटना की जानकारी दी।
दिलीप सिंह के परिवार के लोग मौके पर पहुंचे और शव को घर ले गए। इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया। सोमवार को शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया। मृतक अपने पीछे दो पुत्र बलजीत सिंह और सतनाम सिंह, पत्नी रक्षपाल कौर सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गया है। पुलिस ने बलजीत की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज क ली है। कोतवाली प्रभारी एके सिंह ने बताया कि परिवार के लोग किसी से भी रंजिश की बात से इंकार कर रहे हैं। मृतक की जेब से तीन सौ रुपए की नगदी आदि भी मिली है। इस कारण लूट के लिए हत्या का मामला नहीं बनता है। जांच की जा रही है।
बहादुर सैनिक थे दिलीप सिंह
दिलीप सिंह बहादुर सैनिक थे और पाक, चीन से युद्ध में भाग लेकर उन्होंने कभी भी दुश्मनों को पीठ नहीं दखिाई, लेकिन हत्यारों ने उनकी पीठ पर गोली मारकर हत्या कर दी।
मृतक के पुत्र बलजीत सिंह ने बताया कि चीन से युद्ध के दौरान पिता दिलीप सिंह ने बहादुरी का परिचय देते हुए दुश्मन की सेना के दांत खट्टे कर दिए थे। चीनी सैनिकों को मारने और खदेउ़ने के बाद उनके पिता चीनी सैनिकों की दस राइफल भारत उठा लाए थे। लड़ाई के दौरान उनके पिता के हाथ की उंगली कट जाने पर बाद में सेना ने उन्हें सेवा निवृत्ति दे दी। राइफल उठा लाने के परिणाम स्वरूप पिता को डबल पेंशन मिलती थी।
आखिर क्यों की गई दिलीप सिंह की हत्या
दिलीप सिंह के पास पांच एकड़ जमीन है। जमीन उन्होंने अपने दोनों पुत्रों के बीच बराबर बांट दी थी और खुद दूसरों की जमीन ठेके पर लेकर और पेंशन से गुजर बसर करते थे। दोनों पुत्रों से भी उनके संबंध बेहद मधुर थे। गांव के तमाम लोगों ने बताया कि दिलीप सिंह बेहद मिलनसार और खुश मिजाज थे। यही कारण हैं कि उनकी किसी से रंजिश नहीं है। गांव के लोग भी दिलीप सिंह की हत्या से हतप्रभ हैं। उनका कहना है कि दिलीप सिंह की किसी से रंजिश नहीं थी, ऐसे में उनकी हत्या क्यों की गई यह बड़ा सवाल है।