हादसे में मौत का शिकार हुए चारों लोगों के परिवार के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है। सभी रोज के कमाने और खाने वाले थे।
चालक वीरपाल अपने घर में कमाने वाला घर में अकेला था। उसकी मौत के बाद घर में कोहराम मच गया। पत्नी कृष्णा देवी अपनी सुधबुध खो बैठी है। वह बार-बार पति को आवाज लगाकर मेला चलने की बात कहती है। मृतक के 12 वर्षीय बेटा ऋतिक, 11 वर्षीय मिलन, आठ वर्षीय तन्नू है। पिछले साले वीरपाल के चाचा पर सांड ने हमला कर दिया था। जिससे उनकी मौत हो गई। इससे पहले उनके चाच हरद्वारी और चाचा रामचरन की मौत हो गई थी।
हादसे में मौत को शिकार हुए सगीर रोजाना मजदूरी करके परिवार का गुजारा करते थे। उनकी पत्नी फरजाना और 12 वर्षीय पुत्र फाजिल, 10 वर्षीय वाजिल, पांच वर्षीय अनस और दो वर्ष का हाजिल है। सगीर की मौत से परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। सगीर की मौत के बाद उनके घर में रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
लाल मोम्मद अपने परिवार में अकेले कमाने वाले थे। उनकी पत्नी सोफिया परिवार का गुजारा करने के लिए घर में कालीन बनाने का काम करती हैं। उनका 15 वर्षीय बेटी फारीन, 12 वर्षीय अमरीन, पांच वर्षीय पुत्र असलान हैं। जवान बेटे की मौत से मां हबीबन बेसुध हो गईं हैं।
जगरूप की मौत से उनके घर में कोहराम मच गया है। जगरूप और उनका बेटा व्यापारी लाल दोनों रोजा मंडी में मजदूरी करने आते थे। सुबह व्यापारी लाल साइकिल से पहले निकल गया था। जगरूप टेंपो से मजदूरी करने जा रहे थे। उनकी मौत से पत्नी रामवेटी, 23 वर्षीय बेटी गीता, 12 वर्षीय रुकमणी, आठ वर्षीय गीता का रो-रोकर बुरा है। उनकी बूढ़ी मां रामवती बेटे की मौत से बेसुध हो गईं हैं।
मृतकों के घरवालों से मिले जनप्रतिनिधि
शाहजहांपुर। हादसे की खबर लगने के बाद राज्यमंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा, सपा जिलाध्यक्ष और पालिका चेयरमैन तनवीर खां, बसपा ददरौल विधानसभा के प्रत्याशी मानवेंद्र सिंह पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और मृतकों के परिवार वालों को ढांढस बंधाया।