हादसे का शिकार हुईं महिलाएं और किशोरी यदि मजदूरी पर ही निकली थीं तो उनके लिए पूरे दिन का सहारा महज एक टिफिन में भरी खिचड़ी ही थी। यह खिचड़ी भी कोई ज्यादा नहीं थी, केवल एक बच्चे के पेट भरने लायक थी। इस तरह खिचड़ी मिलने से यह अनुमान पक्का होता है कि ये लोग किसी न किसी काम पर निकले थे। दूसरा यह तथ्य भी सामने आता है कि ये लोग काफी गरीब रहे होंगे। पोस्टमार्टम से पता चला है कि इन सभी छह लोगों में से किसी ने सुबह भी कुछ नहीं खाया था। पिछली रात को खाया खाना पूरी तरह पच चुका था।
थैले में रखा टिफिन पुल की रेलवे पटरियों के बीच में ही पड़ा मिला। इस टिफिन को कंबल व अन्य सामान के साथ सदर बाजार थाने में रखवा दिया गया है, ताकि कोई शिनाख्त करने आता है तो उसे दिखाया जा सके। अब इनकी शिनाख्त कैसे और कब तक हो पाएगी, यह तो पता नहीं। मगर एक उम्मीद यह जरूर की जा सकती है कि बृहस्पतिवार को कुछ न कुछ पता चल जाएगा। यदि यह बात सही है कि ये लोग मजदूरी के लिए निकले थे तो सामान्यत: देर शाम तक ही लौटते होंगे। ऐसे में उस वक्त के बाद ही घर वालों को चिंता हुई होगी या साथ वालों के लौटकर आने पर इन लोगों के गायब होने का पता चला हो। फिलहाल, शिनाख्त के इंतजार में सभी छह शव पोस्टमार्टम हाउस के एक कमरे में रखवा दिए गए हैं। वहां देर रात तक कोई भी शिनाख्त को नहीं पहुंचा था।
मुरादाबाद से आए रेलवे अधिकारियों ने किया मुआयना
शाहजहांपुर। हादसे की सूचना मिलने के बाद मुरादाबाद मंडल मुख्यालय से आरपीएफ के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त रफीक अहमद अंसारी और उनके समकक्ष रेलवे के वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी एपी गौतम दोपहर शाहजहांपुर पहुंचे। इन अधिकारियों का मकसद यह देखना था कि कहीं रेलवे की ओर से तो कोई लापरवाही नहीं रही। दोनों अधिकारियों ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया। इस दौरान पाया कि जिस पुल पर दुर्घटना हुई, उस पर आम लोगों के आने-जाने पर प्रतिबंध है। यानी रेलवे की फिलहाल कोई गलती इन अधिकारियों ने भी नहीं मानी है। इन अधिकारियों ने बाद में एसपी राजेंद्र प्रसाद सिंह यादव से भी मुलाकात की।