पति के इंतकाल के बाद विधवा को उसकी ननद ने घर से बेघर करते हुए उसके मकान में कब्जा कर लिया। ननद भौजाई का यह विवाद जब थाने पहुंचा तो पुलिस की मौजूदगी में दोनों में जमकर तकरार हुई। बाद में पुलिस की कार्रवाई करने की धमकी के बाद मामला शांत तो हो गया, लेकिन दोनों पक्षों के बीच शांतिभंग होने की आशंका बनी हुई है।
यह वाक्या रोजा थाने के मोहल्ला लोधीपुर का है। यहां के नौशे अली के बेटे मोहम्मद आलम का निधन कई साल पहले हो चुका है। बाद में नौशे अली का भी निधन हो गया। विवाद की जड़ में पैतृक संपत्ति है। मोहम्मद आलम की विधवा फहमीदा का आरोप है कि उसकी ननद शबाना अख्तर ने उसके मकान को कब्जाकर घर से बेघर कर दिया। उसकी पति की संपत्ति पर जबरन कब्जा किए हुए है।
विधवा का आरोप था कि उसके देवर जावेद को पिता ने अपने जीवन काल में बेदखल कर दिया था, जिसने उसका फर्जी निकाहनामा तैयार कर उसकी संपत्ति को कब्जाने का प्रयास किया। इसमें उसकी ननद शबाना का भी हाथ है।
विधवा की तहरीर पर पुलिस ने शबाना को थाने में तलब किया। पहले तो दोनों पक्षों में जमकर तकरार हुई। पुलिस इस सारे मामले को मूकदर्शक बनी देखती रही। एक पल तो ऐसा लगा कि कहीं मारपीट न हो जाए। ननद भौजाई की जब तकरार ज्यादा होने लगी तो पुलिस अपने रौब में आ गई। कहा कि दोनों पक्षों को बंद करने की बात कही, तब जाकर मामला कुछ नरम हो सका। शबाना का तर्क था कि भाई की मौत के बाद फहमीदा सबकुछ छोड़कर चली गई थी। उसके पास पिता द्वारा लिखी गई वसीयत है। कई मुकदमे अदालत में चल रहे हैं, उसे अदालत का आदेश ही मान्य है।