मंगलवार को थाना पुलिस ने बरेली डिपो की बस से की जा रही चंदन लकड़ी की तस्करी का भंडाफोड़ किया। पुलिस ने मध्यप्रदेश के निवासी सात महिलाओं समेत आठ लोगों को शक के आधार पर पकड़ लिया। करीब सात लाख की लकड़ी बरामदगी में पूछताछ के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। लकड़ी बरेली डीएफओ के आवास और कैंप कार्यालय परिसर से चोरी बताई जा रही है। चर्चा है कि यहां से चंदन का पेड़ काटा गया है जिसकी लकड़ी कन्नौज ले जाकर बेचने की तैयारी थी। सूचना पर बरेली एसटीएफ और स्थानीय वन विभाग अधिकारी भी आरोपियों से पूछताछ कर रहे हैं। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर एसएसआई अमर सिंह ने पुलिस बल के साथ बरेली की तरफ से आ रही बसों को चेक करना शुरू किया। कुछ देर बाद टनकपुर से कानपुर जा रही बरेली डिपो की बस की तलाशी ली तो उसकी छत पर कपड़े में लिपटे सात गट्ठर मिले। इनमें चंदन की लकड़ी रखी हुई थी। इसके बाद शक के आधार पर पुलिस ने बस में बैठे एक पुरुष और सात महिलाओं को दबोचा। पहले तो इन लोगों ने लकड़ी अपनी होने की बात कबूल नहीं की, लेकिन अन्य मुसाफिरों और परिचालक के बताने पर ये आरोपी सकपका गए। परिचालक और चालक ने यह कहकर सफाई दी कि इन लोगों ने कुछ वजन साथ होना बताया था जो खुद ही छत पर रख लिया। उन्हें नहीं पता था कि कपड़े में लिपटा माल चंदन की लकड़ी है। पुलिस ने लकड़ी को थाने में रखवाकर बस को रवाना कर दिया। इसके साथ ही पुलिस आठों आरोपियों को कोतवाली ले आई। यहां पता लगा कि सभी गिहार जाति के हैं और मध्यप्रदेश के कटनी जिले के गांव सुगमा के मूल निवासी हैं। लकड़ी चोरी के तार बरेली से जुड़े मिले तो पुलिस ने बरेली एसटीएफ को सूचना दी। बरेली एसटीएफ इंचार्ज अजय पाल के नेतृत्व में आई टीम ने जांच शुरू कर दी है। एसटीएफ इंचार्ज ने बताया कि लकड़ी एक क्विंटल 85 किलो है। यह कच्चा चंदन है। इसकी कीमत लगभग सात लाख रुपये है। रेंजर आरपी सिंह भी पूछताछ कर रहे हैं। देर शाम तक इस मामले में मुकदमा दर्ज नहीं हुआ था। वहीं, कस्बा इंचार्ज वकार खां ने बताया कि लकड़ी डीएफओ बरेली के आवास व कैंप कार्यालय परिसर से काटने की बात सामने आ रही है। इसे कन्नौज ले जाया जा रहा था। बस स्टाफ की मिलीभगत प्राथमिक तौर पर सामने नहीं आई है, फिर भी गहनता से जांच की जा रही है।