तत्कालीन जिला पूर्ति अधिकारी जाकिर हुसैन सहित पांच लोगों के खिलाफ कांट थाने में धोखाधड़ी और जान से मारने की धमकी देने की रिपोर्ट कोर्ट के आदेश पर दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है। आरोप है कि जिला पूर्ति अधिकारी ने खुले बाजार में राशन और मिट्टी का तेल बेचने के आरोप में निरस्त की गई दुकान को कोटेदार से साठगांठ करके बहाल कर दिया।
थाना कांट के मोहल्ला शेखान निवासी शहजाद अहमद खां ने कोर्ट के जरिए दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया है कि मोहल्ला केले वाली चौपाल के कोटेदार इकरार अहमद उसे राशनकार्ड होने के बावजूद राशन और मिट्टी का तेल न देकर बाजार में बेच देते हैं। मामले की जांच कराए जाने के बाद कोटेदार को दोषी पाते हुए डीएम के आदेश पर उसका अनुबंधपत्र जिला पूर्ति अधिकारी जाकिर हुसैन ने 24 फरवरी, 2011 को निरस्त कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ कोटेदार ने मंडलायुक्त के यहां अपील की। इस पर 13 जून, 2011 को दोबारा जांच करने का आदेश पारित किया गया। जिला पूर्ति अधिकारी ने 15 जून, 2013 को क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी पीएन शुक्ल और तिलहर पूर्ति लिपिक अनिल श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम गठित कर स्थलीय जांच करने का निर्देश दिया। आरोप है कि इसके पश्चात कोटेदार ने अपनी दुकान को बहाल करने के लिए इन सभी लोगों को रिश्वत देकर साठगांठ कर ली और फर्जी, कूटरचित शपथ पत्र बनवाकर दुकान बहाल करा ली। इस मामले में क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी किशोर कुमार भी शामिल थे। कोटेदार के समर्थन में जिनके नाम से शपथ पत्र दाखिल किए गए थे, जब उन लोगों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने जांच समिति के सामने कह दिया कि उनमें से किसी ने भी कोटेदार के समर्थन में शपथ पत्र नहीं दिए हैं। आरोप है कि इस पर जिला पूर्ति अधिकारी और पूर्ति लिपिक तिलहर ने जान से मारने की धमकी दी। थानाध्यक्ष देवेश सिंह ने बताया कि अभी मामले की विवेचना की जा रही है। बता दें कि जाकिर हुसैन इस समय बरेली में क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी के पद पर तैनात हैं। यहां उन्हें जिला पूर्ति अधिकारी का प्रभार दिया गया था।