सूबे में बेेहतर शिक्षा का सरकार भले ही दावा करे लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश सरकारी कालेजों में हालत बदहाल है। कहीं शिक्षक नहीं तो कहीं पर संसाधनों का अभाव है। नगर में स्थित राजकीय इंटर कालेज की स्थिति और भी खराब है यहां बच्चों से सालाना 300 रुपये लेकर कालेज में प्राइवेट टीचरों को लगाकर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। हैरत कि बात तो यह है कि विज्ञान की प्रयोगशाला का अर्से से ताला नहीं खोला गया, इस कारण यहां रखे उपकरण और केमिकल पर गंदगी की पर्ते जम गई हैं। कटरी क्षेत्र में वर्ष 1985 में लाखों रुपये की लागत से राजकीय इंटर कालेज की स्थापना कराई गई थी। बताते है शुरुआती दौर में सब कुछ ठीक ठाक रहा लेकिन जो स्टाफ के सेवानिवृत अथवा स्थानांतरण पर यहां से गया उसके स्थान पर नई नियुक्ति नहीं हुई। आज आलम यह है कि कालेज में प्रवक्ता के नौ पदों में सभी खाली हैं वहीं एलटी के 12 पदों में मात्र चार पद पर तैनाती है शेष पद खाली पड़े हैं। कार्यालय स्टाफ भी मानक से काफी कम है। स्टाफ की कमी और पढ़ने वाले बच्चों की संख्या करीब 700 पर पहुंच जाने के कारण कॉलेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य ने शिक्षक अभिभावक संघ की बैठक में चर्चा की और आम सहमति से प्रतिछात्र 300 रुपये वार्षिक का शुल्क लेकर नौ प्राइवेट टीचर रख लिए हैं यही टीचर बच्चों को पढ़ा रहे। कॉलेज के विद्यार्थियों की माने तो विज्ञान की प्रयोगशालाएं अर्से से नहीं खुली इस कारण वह लोग प्रैक्टीकल भी नहीं कर पाते।