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पूजा अपहरण मामले की दोबारा जांच करें

Wed, 17 Dec 2014 11:50 PM IST
शाहजहांपुर
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अपहृत बेटी पूजा की बरामदगी की मांग को लेकर करीब दो वर्ष से कलक्ट्रेट पर मौन सत्याग्रह कर रहे बिजलीपुरा के दंपति को आखिरकार राज्य महिला आयोग का सहारा मिल गया। बुधवार को यहां पहुंचीं आयोग की सदस्य डॉ. बेनजीर उमर ने पूजा की मां आशा को पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में बुलाकर घटना का ब्योरा लिया। बाद में महिला थाना प्रभारी पुष्पलता भास्कर और सदर इंस्पेक्टर जेपी तिवारी को प्रकरण की दोबारा छानबीन करने और पूजा का पता लगाने के निर्देश दिए।
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रिक्शा चालक अशोक भोजवाल की बेटी पूजा का मोहल्ले के ही तीन युवकों ने अपहरण कर लिया था। मामले में पुलिस की ढिलाई से परेशान होकर दंपति ने आठ जनवरी, 2013 से कलक्ट्रेट में मौन सत्याग्रह शुरू कर दिया। इस बीच पुलिस ने आरोपियों और विवेचना के दौरान प्रकाश में आए दो अन्य लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा लेकिन पूजा का सुराग नहीं लग सका।
तब से दंपति इस मामले को लेकर जिले के प्रभारी मंत्री ओमप्रकाश सिंह, प्रमुख सचिव अनिल कुमार और अन्य कई अधिकारियों से मिल चुके हैं लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला। बुधवार को यहां आईं डॉ. बेनजीर के संज्ञान में यह मामला लाए जाने पर उन्होंने पूजा की मां आशा भोजवाल से घटना का विवरण लिया।
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सदर इंस्पेक्टर ने डॉ. बेनजीर को बताया कि मामले में दंपति का सहयोग नहीं मिलने का उल्लेख किया। इस पर आयोग की सदस्य ने हरियाणा से एक साल बाद मुक्त कराई गई लखीमपुर खीरी की एक युवती का हवाला देते हुए कहा कि कोशिश करें, कामयाबी जरूर मिलेगी।
 
13 मामले सुने गए, एक निस्तारित
पूजा की मां से बात करने के बाद महिला आयोग की सदस्य ने महिलाओं के उत्पीड़न और उनकी समस्याओं से संबंधित 13 अन्य मामलों की सुनवाई कर एक प्रकरण मौके पर निस्तारित कराया। डॉ. बेनजीर ने कई मामलों में संबंधित अधिकारियों को फोन पर दिशानिर्देश दिए। समीक्षा के दौरान एडीएम पीके श्रीवास्तव ने बताया कि गत एक अप्रैल से अब तक राज्य महिला आयोग से 12 प्रकरण प्राप्त हुए जिनमें से आठ निस्तारित हो चुके हैं और चार शेष मामलों में संबंधित अधिकारियों से जांच आख्या मांगी गई है।

महिला जागरूकता में जुटा आयोग: डॉ. बेनजीर
डॉ. बेनजीर ने बताया कि पहले आयोग तक महिलाओं की शिकायतें पहुंचने में एक-दो माह का वक्त लग जाता था। अब आयोग की सदस्य शहरों और गावों में जाकर महिला पुलिसिंग और सुरक्षा को लेकर जागरूक कर रही हैं। सह शिक्षा (को एजूकेशन) देने वाली शिक्षण संस्थाओं में भी महिला आयोग की टीमें जाकर गोष्ठियां और सेमिनार करा रही हैं। इस कारण अधिकांश मामले समय से निस्तारित हो रहे हैं।
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