एसपी ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि जलालाबाद के मोहल्ला कानून गोयान में रहने वाले झोलाछाप देवेंद्र, उनके बेटे अमित और देवेंद्र के क्लीनिक पर काम करने वाली एक नर्स के बेटे को मध्यप्रदेश के धार जिले में 14 जनवरी को बंधक बना लिया गया था। वहां उन्हें बंधक बनाने वाले अपहरणकर्ताओं ने एक युवक का नपुंसकता का इलाज कराने का बहाना करके बुलाया था। इलाज के बदले एक से डेढ़ लाख रुपये देने का लालच भी दिया गया था। वहां तीनों को बंधक बनाने के बाद देवेंद्र के मोबाइल से कॉल करके 40 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। इसके बाद अपहरणकर्ताओं ने नर्स के बेटे को छोड़ दिया ताकि वह घर पहुंचकर देवेंद्र और उनके बेटे के सकुशल होने की खबर उनके परिवार वालों को दे सके। उसके मोबाइल पर आरोपी बात भी करते रहे। लौटने पर इस मामले में देवेंद्र के बेटे सुमित ने थाना जलालाबाद में मुकदमा दर्ज कराया था। एसपी बबलू कुमार ने बताया कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जलालाबाद पुलिस के साथ क्राइम ब्रांच को भी लगाया गया था। पुलिस ने रुपये भेजने का बहाना करके अपहरणकर्ताओं का बैंक एकाउंट नंबर हासिल कर लिया। उसी के आधार पर सभी अपहरणकर्ताओं का नाम, पता मालूम चल गया।
इसके बाद पुलिस ने अपहरणकर्ताओं और बंधक बनाए गए झोलाछाप और उनके बेटे के मोबाइल नंबरों के आधार पर सर्विलांस के जरिए सही लोकेशन हासिल की। इसके बाद 17 जनवरी जलालाबाद और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम को मध्यप्रदेश भेजा गया। पुलिस टीम ने वहां पहुंचकर योजना के तहत फिरौती की रकम देने और बंधक बनाए गए झोलाछाप और उनके बेटे को छोड़ने का धार जिले में ठिकाना बताया, जो मध्य प्रदेश के अपराध के बूते आजीविका चलाने वाले बरमूडा जनजाति के लोगों का इलाका है। टीम ने मध्य प्रदेश पुलिस के साथ अपहरणकर्ताओं को उनके ठिकाने से कुछ दूरी पर रुपये लेने आने को राजी कर लिया। वहां फिरौती की रकम लेने पहुंचे दो अपहरणकर्ताओं को बैग थामते ही पुलिस ने दबोच लिया।
एसपी बबलू कुमार ने बताया कि उसके बाद पुलिस ने अपहरणकर्ताओं की बस्ती में जाकर दबिश दी और बंधक बनाए गए झोलाछाप और उनके बेटे को छुड़ा लिया। मौके पर तीन अन्य अपहरणकर्ताओं को हिरासत ले लिया गया। इसके बाद पांचों अपहरणकर्ताओं को वहीं कोर्ट में पेश किया गया और ट्रांजिट रिमांड पर शाहजहांपुर लाया गया। पांचों को बृहस्पतिवार को कोर्ट में पेश किया गया जहां उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस कामयाबी के लिए पुलिस टीम को आईजी बरेली रेंज ने 15 हजार रुपये और डीआईजी ने 10 हजार रुपये पुरस्कार देने का ऐलान किया है। एसपी बबलू कुमार ने अपनी ओर से पुलिस टीम को 5 हजार रुपये देने और गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर सम्मानित करने की घोषणा की है।
फिरौती लेकर बाप-बेटे के कत्ल की तैयारी थी
शाहजहांपुर। मध्य प्रदेश के धार जिले के बीहड़ इलाके में बंधक बना रखे गए जलालाबाद निवासी डाक्टर और उनके बेटे को छुड़ाने गई पुलिस टीम को वहां अपहर्ताओं के हमले का भी शिकार होना पड़ा। बंधक बाप-बेटे के रिश्तेदार बनकर सादे वेश में गए टीम के सदस्यों से अपहर्ताओं ने रुपयों से भरे बैग छीन लिए और बैग थमाने वाले को धक्का मारकर गिराने की कोशिश की। गिरफ्तार होने के बाद पांचों ने टीम के सदस्यों को धमकाया कि जेल से छूटते ही इन्हें मारेंगे। अपहर्ताओं ने फिरौती के 40 लाख रुपये मिलने पर उसे आपस में बांटकर बंधक बनाए गए बाप-बेटे का कत्ल कर फेंकने की योजना बना रखी थी।
गिरफ्तार पांचों आरोपी शातिर प्रवृत्ति के हैं और आपस में रिश्तेदार है। इनमें जनपद धार के थाना कानवान क्षेत्र में जूनी पंचायत के पीछे रहने वाले राजेश वर्मा और उसका भाई शक्ति वर्मा, इनका रिश्ते भाई थाना कानवान क्षेत्र के गांव गोलावदा निवासी पप्पू, इनका बइनोई क्षेत्र के थाना बदनावर के गांव वखतगढ़ लालघाटी निवासी जितेंद्र और रिश्ते का समधी जिला इंदौर के थाना देपालपुर क्षेत्र के गांव देपालपुर मंगेश्वरलाल निवासी प्रकाश गेढ़ीबान है। यह सभी आदिवासी हैं। एसपी बबलू कुमार ने कहा कि इस आपरेशन में मध्य प्रदेश की पुलिस की जितनी सराहना की जाए, वह कम है। दूसरे प्रांत में जाकर ऐसा आपरेशन सादी वर्दी में करना काफी जोखिम भरा था। जरा सी चूक टीम के सदस्यों और बंधक बना रखे गए बाप-बेटे के जान के लिए खतरा बन सकती थी। इसीलिए सधे अंदाज में फिरौती की रकम देने का स्थान तय करने में समय लगाया गया ताकि शातिरों के ठिकाने को पूरी तरह समझ लिया जाए। सुरक्षित समझकर जहां पर फिरौती देने को आरोपियों को बुलाया गया, वहां अपहर्ताओं ने टीम की एक कार को टक्कर मारकर पिछला हिस्सा क्षतिग्रस्त कर दिया। हमला होने पर भी फिरौती का बैग थमाने तक टीम के सदस्यों ने शांति बनाए रखी और बैग थामने के लिए जैसे ही एक शातिर बढ़ा तो उस पर टीम के सदस्य टूट पड़े।
किस्सा बताने में देवेंद्र फूटकर रो पड़े
देवेंद्र ने बताया कि वह मधुमेह के मरीज हैं। बंधक बनाने वाले लोगों ने तलावार से उनके सिर पर हमला भी किया था। जिसमें वह बाल-बाल बच गए। उन्होंने कई उनकी और बेटे की पिटाई की थी। उन्होंने बताया कि बंधक बनाने वाले कहते थे कि रुपये मिलने के बाद दोनों का काम तमाम कर देंगे। यह बताते हुए देवेंद्र भावुक हो गए।
ऑपरेशन करने वाली टीम
टीम में प्रभारी इंटेलीजेंस विंग के प्रभारी हिमांशु निगम, जलालाबाद के एसआई विपिन कुमार, इंटेलीजेंस टीम के हेड कांस्टेबिल हरेंद्र यादव और रविशंकर यादव, जलालाबाद के कांस्टेबिल देवेंद्र कुमार शामिल थे।