अपने झूठे अपहरण की झूठी कहानी गढ़कर परिवार वालों को परेशान करने, नौ लोगों को अपहरण के मामले में फंसाकर मुसीबत में डालने और पुलिस की किरकिरी कराने वाला नवजोत जेल के अपने दोस्त के साथ बनारस में मौज कर रहा था। ट्रेन से घर आते समय पुलिस ने एसटीएफ के सहयोग से उसे दबोच लिया और सोमवार को मीडिया के सामने पेश किया। एएसपी सुभाषचंद्र शाक्य ने पत्रकारों को पूरे मामले की जानकारी दी।
बताते चलें कि नवजोत गांव गंगसरा स्थित अपने घर से 19 अगस्त की रात लगभग नौ बजे लापता हो गया था। इस मामले को लेकर आसपास के लोग पुलिस के खिलाफ खड़े हो गए थे। उन्होंने पुलिस पर दबाव बनाने के लिए परिवार वालों के जाम भी लगाया था। एसपी केबी सिंह ने एएसपी सुभषचंद्र शाक्य के नेतृत्व में इंवेस्टीगेशन विंग और एसटीएफ की एक संयुक्त टीम को खुलासे के लिए लगाया था। 27 अगस्त को नवजोत को लखनऊ रेलवे स्टेशन से पकड़ लिया गया। पूछताछ में नवजोत ने बताया कि मई में एक लड़की को भगाने के आरोप में उसे जेल भेजा गया था। जेल में उसकी मुलाकात बनारस के योगेश से हुई। दोनों दोस्त बन गए। उसने दोस्त योगेश से मिलकर परिवार के लोगों पर दबाव बनाकर प्रेमिका से शादी करने के लिए अपहरण का नाटक किया था।
जेल से छूटने के बाद परिवार के लोगों ने उस पर तमाम बंदिशें लगा दी थीं। योगेश आठ अगस्त को जेल से रिहा हो गया तो दोनों ने योजना को परवान चढ़ाने का निर्णय लिया। योजना के तहत योगेश 19 अगस्त को गंगसरा पहुंचा। रात में नवजोत बहन से बात करते हुए घर के बाहर निकला और संदिग्ध लोग होने की बात कहते हुए फोन स्विच ऑफ कर दिया। इसके बाद योगेश के साथ शाहजहांपुर पहुंचा और फिर ट्रेन से बनारस चला गया। वहां किराए पर कमरा लेकर रहने लगा।
टीवी, इंटरनेट आदि से उसे पता चला कि उसके अपहरण के मामले में बड़ा बवाल हो रहा है और पिता ने नौ लोगों पर रिपोर्ट करा दी है तो उसने फेसबुक मेसेंजर से वीडियो क्लिप बनाकर अपने चचेेरे भाई को भेजी और सारा वाकया बताया। नवजोत के अनुसार उसने प्रेमिका से शादी करने के लिए दबाव बनाने को ही सारा ड्रामा रचा था। घर लौटते समय पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस नवजोत के बयान न्यायालय में कराएगी।