मेडिकल कैंप के नाम पर हो रही ठगी
पुवायां तहसील क्षेत्र में इंटरनेशनल मार्केंटिंग कारपोरेशन प्रा. लि. के बैनर तले चालू मार्च में शुक्रवार तक बिना स्वास्थ्य विभाग की विधिक अनुमति के ही तीन मेडिकल कैंप लगाए गए। इसमें बिना खून या पेशाब की जांच किए एवं बिना एमआरआई या सीटी स्कैन के ही इलेक्ट्रो मैग्नेटिक बाडी एनालाइजर मशीन से एक ही बार में 36 रोगों की जांच का दावा किया जा रहा है और बीमारियां बताकर जांच कराने वाले से कैंप में लगे स्टाल से डेढ़ से तीन हजार रुपये की दवाओं की थैली थमाई जा रही है। शिविर के समापन पर इस संबंधी मिली जानकारी पर सीएमओ ने गंभीर संज्ञान लिया और ऐसे कैंप लगाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना तय किया। शुक्रवार को खुटार के पुवायां मार्ग पर रामपुर कलां में इसी संस्था की ओर से मेडिकल जांच कैंप लगाया गया। आयोजकों ने दावा किया कि लैपटाप से कनेक्ट छोटी मैगनेटिक मशीन शरीर में हर मर्ज को बताने में सक्षम है। मशीन से जांच के बाद रोगी को कोई जांच पर्ची नहीं दी जाती है। शिविर में कई डॉक्टरों के आने का जिक्र भी हैं, डॉक्टरों के नाम बताए जाते हैं, लेकिन डॉक्टरों की शैक्षिक योग्यता का कोई विवरण नहीं दिया गया है। पूछने पर डाक्टरों ने अपनी योग्यता के बारे में शाम को मोबाइल पर बताने का आश्वासन दिया लेकिन शाम को लगातार काल किए जाने पर रिसीव नहीं हुआ। आयोजकों का दावा है कि डाइबिटीज, जिगर रोग, आंत में सूजन, स्तन की गांठ, बांझपन, हड्डी का दर्द, दिल का रोग, ब्लड प्रेशर, दौरे, गंजापन, गुर्दे की पथरी, मानसिक रोग और समस्त बीमारियों इस जांच में पता चलता है।
एक हजार रुपये से कम की नहीं होती दवा
खुटार /पुवायां। शिविर में एक रोगी को एक हजार रुपये से कम का नुस्खा नहीं थमाया जाता है। कई रोगियों की दवा तो तीन हजार रुपये तक जा पहुंचती है। जब शिविर में रोगियों को देख रहे इकबाल अहमद से संवाददाता ने संपर्क कर शैक्षिक योग्यता के बारे में सवाल किया तो उनके स्थान पर खुद को राठौर बताने वाले व्यक्ति ने कहा कि रोगी देखने वाले वैद्य हैं। इसके बाद संवाददाता को शिविर का प्रचार करने और इसकी एवज में 'सहयोगÓ करने का प्रलोभन दिया गया। राठौर ने कहा कि शिविर में रोगियों को उचित दवाएं और सलाह दी जाती है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
तीन सौ रुपये है रोगी देखे जाने की फीस
खुटार / पुवायां। शिविर में भले ही कोई क्वालीफाइड डॉक्टर रोगियों को न देख रहा हो, लेकिन फीस एमडी और एमएस डॉक्टरों से कम नहीं है। शिविर में रोगी को सबसे पहले तीन सौ रुपये देकर पर्चा बनवाना पड़ता है और उसके बाद वैद्य उसे देखकर हजार से लेकर तीन हजार रुपये की दवा का पर्चा थमा देते हैं। लिखी गई दवा भी शिविर में ही मिलती हैं।
वर्जन
आईएमसी या आयुर्वेद के नाम पर किसी भी संस्था को पुवायां तहसील क्षेत्र में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर की अनुमति विभाग की ओर से नहीं दी गई है। मेडिकल जांच के नाम पर आमजनों को आर्थिक चपत लगाने और मानसिक तौर पर भयाकुल करने वालों के खिलाफ जांच कराई जाएगी एवं बिना अनुमति ऐसे शिविर लगाने पर विधिक कार्रवाई करेंगे। आमजन से भी अपील है कि बिना विधिक अनुमति वाले ऐसे शिविरों से दूर रहें और इसकी भनक लगते ही विभाग को सूचित करें ताकि तत्काल कार्रवाई की जाए। -- डॉ. कमल कुमार, सीएमओ शाहजहांपुर।
भुक्तभोगी का बयान
बीते तीन मार्च को खुटार - पुवायां के बीच कन्नापुर में आईएमसी की ओर से मेडिकल शिविर लगा था। तीन सौ रुपये लेकर दिखाया तो बिना एमआरआई या सीटी स्कैन अथवा खून या पेशाब के जांच के ही दिमाग में खून का थक्का जमने, किडनी सिस्टम में खराबी आ जाने और हृदय की नलियों के जाम होने की सरीखी विकार पाए जाना बताया। तत्काल वहीं 2400 रुपये की दवा खरीदी और घर लौटा तो पूरी रात सो नहीं पाया। संस्था के कस्टमर केयर नंबर पर संपर्क किया तो जवाब मिला कि थोड़ी देर में संपर्क किया जाएगा लेकिन अब तक नहीं किया गया। बाद में जिला अस्पताल और एक निजी अस्पताल में जाकर दिखाया तो डाक्टरों ने मुझे पूरी तरह फिट बताया तो मुझे ठगे जाने का अहसास हुआ। इसकी शिकायत स्वास्थ्य महकमे से करुंगा। -- राजीव अग्निहोत्री, खुटार के मलिका गांव निवासी युवक।