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कई राजनीतिक दलों के कार्यालयों पर चला बुल्डोजर

Thu, 07 May 2015 11:37 PM IST
मीरानपुर (कटरा)
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हाईवे चौड़ीकरण को लेकर दूसरे दिन भी जमीन खाली कराने के लिए अभियान चलाया गया । दूसरे दिन कई राजनीतिक दलों के कार्यालयों को ढहाया गया।
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बुधवार को हुए हल्के बवाल को देखते हुए गुरुवार को एसडीएम के नेतृत्व में अभियान चलाया गया। दूसरे दिन जेसीबी ने कई बड़े भवनों सहित राजनीतिक दलों के कार्यालयों को भी ढहा दिया। इसके आलावा जिन लोगों ने अपने मकान खुद तोड़ लिए थे, उन पर भी अधिकारियों ने बुल्डोजर चलवा दिए। इसे लेकर कुछ मकान स्वामियों से जेसीबी चालकों की नोकझोंक भी हुई, लेकिन बाद में मामला शांत हो गया। बृहस्पतिवार को मोहल्ला बंगशान, अफरीदी, कोरियान सहित सराय में अतिक्रमण अभियान चलाया गया और हाइवे की जद में आने वाले मकानों और दुकानों को तोड़ा गया। फिलहाल सुबह 11 बजे से शुरू हुआ अतिक्रमण अभियान शाम छह बजे तक चलता रहा। इस मौके पर एसडीएम वंदना त्रिवेदी, सीओ पुवायां उमेश शर्मा, एसओ कटरा, खुदागंज, जैतीपुर, गढ़िया रंगीन सहित इरा कंपनी के अधिकारी मौजूद रहे।

आज भी जारी रहेगा अभियान
इरा कंपनी के प्रोजेक्ट हेड मनोज पांडेय ने बताया कि जब तक हाइवे की जद में आने वाला अतिक्रमण पूर्ण रूप से हट नहीं जाता कार्य चलता रहेगा।

बारात आने से पहले ही उजड़ गया आशियाना
बृहस्पतिवार सुबह मोहल्ला कहरान की कुछ महिलाएं एसडीएम के पास पहुंचीं। उन्हें बताया कि उनके घर में आज बेटी की शादी है। शाम को बारात आएगी। लिहाजा उन्हें एक दिन की मोहलत दे दी जाए। कल वे खुद ही घर तोड़ देंगी। एसडीएम ने इन महिलाओं की एक न सुनी और उनका घर भी तुड़वा दिया।
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आखिर जाएं तो जाएं कहां
मीरानपुर कटरा। हाईवे चौड़ीकरण के लिए बुधवार से नगर में हाईवे की जद में आने वाले भवनों को तोड़ने से कई परिवार बेघर हो गए हैं। इन लोगों ने मासूम बच्चों और महिलाओं के जलकल विभाग दफ्तर के परिसर में डेरा डाल लिया है।
इस दौरान जब संवाददाता ने उनसे बात की तब उनका दर्द आसूं बनकर छलकने लगा। अपने आशियाने को छोड़ने के बाद मोहल्ला कोरियान की रेखा पत्नी सकटे ने बताया उसके पति के बाप-दादों के मकान का उसे ठीक ढंग का मुआवजा तक नहीं मिल पाया। उसने बताया कि जिस मकान की कीमत आज पांच लाख थी उसका मुआवजा मात्र आठ हजार रुपये आया है। नन्ही पत्नी डल्लू कहती हैं हम लोग बेघर हो गए है, हम गरीबों के पास इतनी रकम भी नही कि अब दूसरा मकान बना सके। वहीं श्यामा देवी पत्नी मैकू लाल, नन्ही देवी पत्नी मुन्ना लाल, संतोषी पत्नी रामपाल, मंजू पत्नी दयाराम, यशोदा पत्नी दीनदयाल आदि रुंधे गले से बताते हैं कि हम लोग तो बर्बाद हो गए। अब तो हम लोगों के पास न तो इतना धन है और मुआवजा भी न काफी मिला है। इस कारण अब हम लोग दर दर भटकने को मजबूर है।
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कल जहां थी रौनक आज है वीराना
अभियान के बाद नगर का जो हाल हुआ है उसे देखकर एक बार हर किसी का दिल दहल रहा है क्योंकि कल तक बनी बिल्डिंग के स्थान पर आज खंडहर नजर आ रहे हैं। मकानों के कल तक जो मालिक थे आज मजदूरों की तरह लग कर खुद ही मलबा हटाने में लगे हैं।
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