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दो सगे भाइयों समेत तीन को उम्रकैद

Thu, 17 Sep 2015 11:23 PM IST
शाहजहांपुर
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कोर्ट ने दो सगे भाइयों समेत तीन लोगों को उम्रकैद और बीस-बीस हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनाई है, जबकि एक आरोपी की पहले ही मौत हो गई थी। उन्होंने अवैध संबंधों का विरोध करने पर दो अक्तूबर 2003 को चार लोगोें की सरेआम हत्या कर दी थी।
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सिंधौली थाना क्षेत्र के लखराम निवासी युनूस खां गांव के ही बालकराम के घर आता-जाता था। उसी दौरान यूनुस खां के उस परिवार की एक महिला से अवैध संबंध हो गए थे। इससे गांव में बिरादरी की हुई बदनामी का हवाला देते हुए गयादीन जाटव ने ऐतराज जाहिर किया था। उन्होंने बालकराम के यहां आवाजाही ना करने के लिए यूनुस को समझाया। इसके करीब सप्ताह भर बाद दो अक्तूबर 2003 की शाम साढ़े सात बजे गांव के निकट सुनसान खेतों की पगडंडी पर यूनुस ने तीन अन्य लोगों के साथ मिलकर गयादीन को घेर लिया और लाठी-डंडे से प्रहार कर जमीन पर गिरा दिया। फिर उसे खींचते हुए यूनुस के घर में ले जाया गया। वहां मो. शेर खां और सरदार खां ने मिलकर गयादीन को जमीन पर गिराकर पकड़े रखा और यूनुस व उसके भाई नबी शेर ने बांके से उसके शरीर के कई टुकड़े कर दिए।
इस घटना की सूचना से इलाके में सनसनी फैल गई। लाश को सामने रखकर मृतक के पिता स्वामी दयाल ने सिंधौली थाने में चारों आरोपियों के खिलाफ नामजद तहरीर दी थी। उसके आधार पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 302, एससी एसटी एक्ट आदि के तहत मुकदमा दर्ज किया था। अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय पीके चौरसिया ने गवाहों, साक्ष्यों और बचाव पक्ष के वकील के साथ ही सरकारी वकील सुनील कुमार सिंह के तर्को को सुनने के उपरांत कोर्ट ने जीवित नामजद तीनों आरोपियों को दोषी पाया। कोर्ट ने बृहस्पतिवार को आरोपी पक्ष के दो सगे भाइयों समेत तीन को दोषी सिद्ध पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई और 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड मुकर्रर किया। अर्थदंड के रूप में जमा होने वाली राशि में आधी रकम मृतक के पिता स्वामी दयाल को दिए जाने का निर्देश दिया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान एक नामजद आरोपी शेर खां की मौत हो चुकी है।
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