गैंगरेप के 13 वर्ष पुराने मुकदमे में अपर द्वितीय सत्र न्यायाधीश पीके चौरसिया ने सोमवार को तीन आरोपियों को आजीवन कारावास और 20-20 हजार जुर्माने की सजा सुनाई। यहां बता दें कि 13 साल बाद आए इस फैसले में काफी पहले पीड़िता की मौत हो चुकी है।
बंडा क्षेत्र के गांव पहुरहैया निवासी एक महिला ने अपने साथ रेप के मामले में चार मार्च 2002 को क्षेत्र के गांव धरमगदापुर निवासी सूरजपाल, गांव उगनापुर निवासी हाकिम और गुड्डू के विरुद्ध के खिलाफ थाना बंडा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
आरोपी सूरजपाल की पत्नी दाई का काम करती थी। पीड़िता भी लोगों के बुलाने पर धरमगदापुर दाई का काम करने चली जाती थी। सूरजपाल की पत्नी इसी बात को लेकर पीड़िता से रंजिश मानने लगी थी। इसी रंजिश के चलते तीन मार्च 2002 का रात नौ बजे दूसरे आरोपी हाकिम सिंह ने पीड़िता को अपने यहां बच्चा होने की बात कहकर नार कटवाने के लिए बुलाया था। पीड़िता के धरमगदापुर पहुंचने पर सूरजपाल, हाकिम और गुड्डू गांव के बाहर खड़े मिले। तीनों अभियुक्त पीड़िता को जबरन एक बाग में ले गए और तलवार दिखाते हुए बारी-बारी से रेप किया।
पुलिस ने विवेचना के उपरांत तीनों अभियुक्तों के खिलाफ 21 मार्च 2002 को आरोप पत्र अदालत में दखिल किया गया था। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान अभियोजन की ओर से छह गवाह पेश किए गए थे। मुकदमे के दौरान पीड़िता की मौत हो गई थी। अभियोजन पक्ष के ओर से पैरवी सरकारी वकील सुनील कुमार सिंह ने की।