थाना निगोही क्षेत्र के गांव गौटिया में रहने वाले छह वर्षीय रमन की शनिवार को खसरा की चपेट में आकर मौत हो गई। रमन पिछले चार दिनों से खसरा के बुखार से पीड़ित था, लेकिन परिवार के लोग इलाज कराने के बजाय उसकी झाड़-फूंक कराने में लगे रहे। शनिवार सुबह हालत बिगड़ने रमन को निगोही के एक निजी चिकित्सक को दिखाया गया। डॉक्टर ने उसकी हालत गंभीर देखकर जवाब दे दिया। इसके बाद जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। रमन अपने मां-बाप की इकलौती संतान था।
गांव गौटिया में रहने वाले संजीव कुमार खेतिहर मजदूर है। उसका छह साल का बेटा रमन चार दिन पहले खसरे की चपेट में आ गया। परिवार के लोग पढ़े-लिखे नहीं हैं। अपने बीमार बेटे की झाड़-फूंक कराने में लगे रहे। रमन की हालत बिगड़ती गई। शनिवार की सुबह हालत ज्यादा बिगड़ने पर संजीव और उनकी पत्नी मीना बेटे रमन को निगोही के एक प्राइवेट चिकित्सक के यहां लेकर आए, यहां हालत गंभीर देखकर उसने जवाब दे दिया। इसके बाद दोनों रमन को जिला अस्पताल लेकर आए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, रमन ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया था। डॉक्टरों ने रमन को देखकर उसे मृत घोषित कर दिया।
बेटे की मौत पर मां-बाप हुए बेसुध
रमन की मौत के बाद संजीव रो-रोकर कह रहा था कि वह बेटे का इलाज कराना चाहता था, लेकिन परिवार के लोगों ने अंधविश्वास के चलते उसे इलाज नहीं कराने दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। मीना भी बेटे की मौत से बेसुध हो गई। बेटे के जाने के बाद उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। अंधविश्वास में पड़कर इकलौते बेटे को खो दिया।