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एफआईआर दर्ज न करने पर नपे रोजा के थानेदार

Sat, 26 Dec 2015 11:30 PM IST
रोजा/शाहजहांपुर।
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 हफ्ते भर पहले रात के समय फैजाबाद डिपो की रोडवेज बस के कंडक्टर से हाइवे पर हुई लूट की वारदात दर्ज करने में हीलाहवाली करने और लूट के मामले को गुमशुदगी के तौर पर दर्ज किए जाने के मामले पर एसपी बबलू कुमार ने गंभीर संज्ञान लेते हुए रोजा थाना प्रभारी के निलंबन की कार्रवाई की है। इंस्पेक्टर आरएन चौधरी को बीती देर रात ही तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए रोजा थाने में ही तैनात एसएसआई ओपी गौतम को एसओ का चार्ज सौंपा है। उन्हें भी 15 दिनों में बेहतर काम करके दिखाने को कहा गया और उसके बाद नए थाना प्रभारी की तैनाती के बारे में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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इस लूट संबंधी वाकये और अद्यतन स्थिति को अमर उजाला ने लगातार प्रमुखता से प्रकाशित किया। बीते 19 दिसंबर की रात करीब साढ़े नौ बजे फैजाबाद डिपो की अंबेडकरनगर के साबितपुर से दिल्ली को जाने वाली रोडवेज बस के कंडक्टर माखन लाल यादव को रोजा थाना क्षेत्र के मेजबान होटल के पास तीन बदमाशों ने तमंचे के बल लूट लिया था। लुटेरे कंडक्टर से 47 हजार रुपये नगद, सरकारी बैग और अन्य दस्तावेज भी लूट ले गए थे। घटना के बाद कंडक्टर ने 100 नंबर पर डायल कर पुलिस कंट्रोल रूम को हुए वारदात की सूचना दी थी। तब रोजा थाना के प्रभारी निरीक्षक आरएन चौधरी ने घटना का अल्पीकरण करते हुये गुमशुदगी लिखी थी। कई बार गुहार करने पर भी लूट की रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई तो कंडक्टर जनसुनवाई के दौरान एसपी को पूरे प्रकरण की जानकारी देते हुए न्याय की गुहार की। तब एसपी के निर्देश पर घटना के पांच दिन बाद तीन अज्ञात बदमाशों के खिलाफ लूट की रिपोर्ट दर्ज उसी प्रभारी निरीक्षक ने दर्ज की।
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इंस्पेक्टरों के लिए आसान नहीं है थाना रोजा का चार्ज
राजेश बाजपेयी
रोजा।  इंसपेक्टरों के लिये रोजा थाने का चार्ज चलाना कांटों के ताज के समान है। अपग्रेड होने के बाद इस थाने में तैनात रहे अब तक तीनों प्रभारी निरीक्षकों को निलंबित होना पड़ा है। कारण चाहे कुछ भी हो लेकिन इतना साफ है कि इस थाने का चार्ज संभालना हर किसी के बस की बात नही।
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बता दें कि वर्ष 1982 में रोजा थाने के गठन के बाद से करीब 30 सब इंस्पेक्टरों ने यहां का चार्ज संभाला था। उसके बाद एक जुलाई 2014 को रोजा थाने को कोतवाली का दर्जा देते हुए इंस्पेक्टर का पद सृजित किया गया था। पहले प्रभारी निरीक्षक के रूप में तीन जुलाई 2014 को यहां वीरपाल सिंह की नियुक्ति हुई थी, लेकिन लूट की हो रही वारदातों को रोकने में नाकाम रहने पर उसी वर्ष 12 सितंबर को वह निलंबित कर दिए गए थे। उसके बाद अजीत सिंह को इंस्पेक्टर बनाया गया जो छह माह के कार्यकाल में निलंबित हो गए। इंस्पेक्टर आरएन चौधरी यहां इसी वर्ष 15 मार्च को तैनात हुए थे। सबकुछ ठीक ठाक चल रहा था कि बस कंडक्टर लूटकांड को हलके में लेना उनके गले का फंदा बन गया। अब वह भी निलंबित हो चुके हैं।
शहर से सटे रोजा थाना काफी अहम माना जाता है। यहां निलंबन का क्रम तो एसओ रहे हरीराम त्रिपाठी के समय से चल रहा है, जो मुकरमपुर दोहरे हत्याकांड के कारण मात्र 11 दिन ही यहां प्रभारी रहे थे। ऐसा नहीं है कि यहां सफ ल थानेदारों का अभाव रहा है। इतिहास को देखें तो सीके मिश्रा, पीएन यादव, सियाराम वर्मा और आरएस यादव सरीखे थानेदारों ने दो साल से ज्यादा का लंबा वक्त यहां काटा एवं कम समय के लिए तैनात रहे अरविंद सिंह, राजेश कुमार सिंह. केके तिवारी, गंभीर सिंह, गोवर्धन सिंह आदि थानेदार भी यहां सफल रहे थे।
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