शहर के मोहल्ला अलीजई में रहने वालेे अशफाक अली के 10 वर्षीय बेटे राकिब की बुखार से शहर के एक निजी अस्पताल में शुक्रवार की सुबह मौत हो गई। जिला अस्पताल में शुक्रवार को बुखार के करीब 50 मरीजों को शाम तक भर्ती किया गया था। जिसमें से 20 मरीज डेंगू के संभावित बताए जा रहे हैं। यहां पहले से भर्ती मरीज डेंगू की दहशत की वजह से अस्पताल छोड़ने को तैयार नहीं हैं। इसकी वजह अस्पताल प्रशासन को नए मरीज भर्ती करने लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मोहल्ला अलीजई में निवासी अशफाक प्राइवेट काम करते हैं। उनका इकलौता बेटा राकिब पड़ोस के स्कूल में कक्षा दूसरी का छात्र था। दो दिन पहले राकिब को बुखार आ गया। परिवार के लोगों ने उसे शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। राकिब के शरीर में चकत्ते पड़ गए थे। बुखार की जांच में उसकी प्लेटलेट्स कम पाई गई थी। शुक्रवार की सुबह राकिब ने दम तोड़ दिया। राकिब की मौत से घर कोहराम मच गया। मृतक की मां आशा बेटे की मौत से बेसुध हो गई हैं।
डेंगू की दहशत की वजह से अस्पताल नहीं छोड़ रहे मरीज
जिला अस्पताल में तकरीबन 50 से 60 मरीज बुखार के भर्ती हो रहे हैं। मरीजों की संख्या बढ़ने की वजह से पहले ही सौ अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गई है। जो कि सभी फुल हैं। जांच में प्लेटलेट्स कम आने पर भर्ती मरीज डेंगू की दहशत की वजह से अस्पताल छोड़ने को तैयार नहीं हैं। जिसकी वजह से अस्पताल प्रशासन को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बुखार से होने वाले भर्ती मरीज की जांच रिपोर्ट अगले दिन आ पाती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर उनका इलाज शुरू किया जाता है। प्लेटलेट्स कम होने से मरीज डेंगू की दहशत की वजह से अस्पताल छोड़ने को तैयार नहीं होते। जिसकी वजह से अस्पताल में मरीजों की संख्या कम नहीं हो पा रही है। अभी तक डेंगू की जांच के लिए 84 सैंपल लखनऊ भेजे गए। जिसमें से करीब 40 मरीजों की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
- डॉ. केशव स्वामी, सीएमएस जिला अस्पताल