बोर्ड परीक्षा केंद्र के लिए ऑनलाइन आवेदन में प्रधानाचार्यों ने फर्जी सूचनाएं भरकर बोर्ड को भेज दीं। इसका खुलासा तब हुआ जब ऑनलाइन सूचनाएं एकत्र करने के बाद उसकी हार्ड कॉपी लेकर डीआईओएस डॉ. केएल वर्मा ने स्कूलों का भौतिक सत्यापन किया। इसमें पता चला कि अधिकांश प्रधानाचार्यों ने गुमराह करते हुए भ्रामक सूचनाएं अपलोड करने में कोई संकोच नहीं किया और घोषणा पत्र भी झूठा दे दिया। गलत सूचनाएं देने के आरोप में डीआईओएस ने संबंधित स्कूलों के प्रधानाचार्यों को नोटिस जारी करते हुए विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। इस संबंध में डीआईओएस ने माध्यमिक शिक्षा परिषद की नीतियों से अवगत कराते हुए बताया कि इस बार नकल रोकने के लिए सचिव परिषद ने बोर्ड परीक्षा के लिए ऑनलाइन सूचनाएं कॉलेजों से मांगी थीं। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर कंप्यूटर से ही केंद्रों का निर्धारिण होना तय किया गया है। सूचनाएं अपलोड होने के बाद प्रधानाचार्यों ने अपने कॉलेज की सूचनाआें संबंधी जो हार्ड कॉपी उपलब्ध कराई है, उसका भौतिक सत्यापन शुरू किया गया। उन्होंने पहले चरण में जनपद के 60 स्कूलों का निरीक्षण किया, तो पता चला कि लगभग 70 प्रतिशत यानि 42 स्कूलों ने अपने कॉलेज को केंद्र बनवाने के लिए झूठी और गलत सूचनाएं अपलोड कर दी हैं।
उन्होंने बताया कि किसी ने चहारदीवारी नहीं होते हुए भी उस कॉलम में हां भर दिया है। इसी तरह फर्नीचर कहीं 200 विद्यार्थियों के लिए ही है, लेकिन उन्होंने इससे कई गुना अधिक दर्शा दिया है। कहीं शौचालय नहीं तो कहीं कक्षा संख्या पर्याप्त नहीं, शिक्षण कक्ष भी मानक के अनुरूप नहीं, बिजली, पानी का भी अभाव देखने को मिला। इसी तरह कंप्यूटर, स्ट्रांग रूम भी बहुत स्कूलों में नहीं मिले, लेकिन प्रधानाचार्यों ने सभी सूचनाएं मिथ्या देकर विभाग को भ्रमित किया। इन सभी के खिलाफ नोटिस जारी करते हुए विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। डीआईओएस ने बताया कि जनपद में इस समय 360 कॉलेज हैं। शेष कॉलेजों का सत्यापन शीघ्र की किया जाएगा।