जिला अस्पताल में एक प्रसूता और उसके पति ने स्टाफ पर उनका जिंदा बच्चा किसी और को और मरा बच्चा उन्हें देने का आरोप लगाते हुए जमकर बवाल किया। इस दौरान जुटी भीड़ ने जिला अस्पताल गेट के सामने रोड पर जाम लगा दिया। इससे करीब एक घंटे तक दोनों ओर वाहन फंसे रहे। मौके पर पहुंची पुलिस ने जाम खुलवाया। साथ ही बच्चे और मां-बाप का डीएनए टेस्ट कराने का आश्वासन देकर मामला शांत कराया।
कांट थाना क्षेत्र के गांव नरायनपुर की मंजू देवी पत्नी महिपाल सिंह यादव ने कांट सीएचसी पर शुक्रवार को एक बच्चे को दोपहर एक बजे जन्म दिया था। जन्म के बाद बच्चे की हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया था। शुक्रवार शाम 04:35 बजे उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जिला अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। इस वजह से बच्चे को सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) के यूनिट नंबर दो में भर्ती किया गया था।
सोमवार रात बच्चे की हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। मंगलवार सुबह सवा सात बजे डॉ. केपी सिंह ने बच्चे का शव मंजू देवी को दिया। इस पर मंजू ने कहा कि यह तो उसका बच्चा नहीं है। उसके दाहिने पैर में स्याही लगी थी, जबकि जिस बच्चे का शव दे रहे हैं, उसके बायें पैर में स्याही लगी है। इस पर नर्सों ने उसे डांट-डपटकर भगा दिया। अस्पताल गेट पर आकर मंजू और महिपाल रोने लगे। इसी दौरान वहां भीड़ एकत्र हो गई। लोगों के कहने पर दंपति बच्चे का शव लेकर जिला अस्पताल गेट के सामने रोड पर बैठ गए। इससे सड़क पर जाम लग गया। मामले की सूचना पाकर पहुंची कोतवाली पुलिस ने करीब नौ बजे जाम खुलवाने की कोशिश की तो कुछ लोगों ने विरोध किया। इस पर पुलिस ने लाठी फटकार कर जाम खुलवाया।
मामले की सूचना मिलने पर तहसीलदार ओंकारनाथ और सीओ सिटी डॉ. गोपाल कृष्ण यादव मौके पर पहुंचे और पीड़ित को समझाने लगे। इसी दौरान मौके पर पहुंचे कांग्रेस जिलाध्यक्ष कौशल मिश्रा ने दंपति को सहारा देकर समझाया और न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। साथ ही बच्चे के शव और दंपति का डीएनए टेस्ट कराने की मांग की। इस पर सीओ सिटी ने दंपति से तहरीर लेकर डीएनए टेस्ट कराने का आश्वासन दिया। सीओ के आश्वासन पर दंपति शांत हो गए और बच्चे के शव का पोस्टमॉर्टम कराने के लिए भेज दिया गया।
एसएनसीयू में न भेजने पर मंजू थी गुस्सा
रात्रिकालीन ड्यूटी पर तैनात स्टॉफ नर्स इंद्रजीत कौर और मीनाक्षी सिंह ने कहना है कि बच्चे को बदलने की बात निराधार है। यह बच्चा मंजू देवी का ही है। शाम को छह से आठ बजे तक डॉक्टरों की विजिट होती है। रविवार शाम को डॉक्टर की विजिट की वजह से उसे रोक दिया गया था। कहा कि महिला के गंदे होने की वजह से उसे एसएनसीयू में अंदर नहीं जाने देते थे। इसी वजह से वह परेशान कर रही है।
Òबच्चा बदलने का आरोप निराधार है। महिला गलत आरोप लगा रही है। दरअसल, वह बच्चे की मौत को स्वीकार नहीं कर पा रही है।Ó
- डॉ. केपी सिंह , बालरोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल
एक भी बच्चा नहीं हुआ डिस्चार्ज
स्टॉफ नर्स अंशिका गुप्ता ने बताया कि सोमवार को सिंधौली थाना क्षेत्र के गांव सपुलिया की रेशमा के बच्चे को डिस्चार्ज किया गया था। महिला के आरोप की वजह से उस बच्चे को भी रोक लिया गया था। कहा कि एक भी बच्चा डिस्चार्ज नहीं किया गया, जिससे कि यदि महिला को सभी बच्चे दिखाकर पहचान कराई जा सके।
मंजू को हुआ था सातवां बच्चा
मंजू देवी के यह सातवां बच्चा था, जिसकी मौत हो गई थी। उसके छह बच्चे अभी भी जीवित हैं। मंजू के पहले पति रामचंद्र जाटव से जगवीर, कुसुमा देवी, रेखा और अजयवीर चार संतानें हैं। इसके बाद उन्होंने मदनापुर थाना क्षेत्र के लक्ष्मी प्रतापपुर के महिपाल सिंह यादव से शादी कर ली थी। महिपाल से सोनी और मोनी दो बेटियां हैं।