तहसील क्षेत्र में डेंगू और दिमागी बुखार से अब तक छह लोगों की जान जा चुकी है। खुटार के गांव भरकलीगंज में दो दिन में दो बच्चों की मौत हो चुकी है और कई बच्चे बुखार से पीड़ित हैं। गांव के लोगों का कहना है कि सूचना के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव आकर जांच करने और दवा वितरण करने की जरूरत नहीं समझी है।
गांव भरकलीगंज में शनिवार को शहाबुद्दीन की आठ वर्षीय पुत्री अमन की डेंगू से मौत हो गई। उसका पूरनपुर के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। 17 सितंबर को इसी गांव के फहीम के पुत्र अब्दुल की भी मौत हो चुकी है। गांव के लोगों का कहना है कि उन्होंने मामले की जानकारी खुटार के सरकारी अस्पताल को दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। सरकारी अस्पताल के प्रभारी डॉ. संजीव कुमार का कहना है कि उन्हें डेंगू से मौतों की कोई सूचना नहीं मिली है।
इससे पूर्व खुटार के मोहल्ला पूर्वी गढ़ी निवासी प्रदीप कुमार की बुखार से दिल्ली में मौत हो चुकी है। मैलानी निवासी शिवा की पुत्री तीन वर्षीय सना की छह सितंबर को अपने नाना खुटार के मोहल्ला सरोजनी नगर निवासी गुलशेर के घर बुखार से मौत हो चुकी है। पुवायां के मोहल्ला छावनी निवासी राधेश्याम मिश्रा के पुत्र आशीष की 13 सितंबर को डेंगू से और खुटार के गांव इटौआ निवासी रामचरन के पुत्र ब्रजेश की मौत दिमागी बुखार से हो चुकी है। डेंगू और दिमागी बुखार से लगातार हो रही मौतों से लोग दहशत में हैं।
खुटार के मोहल्ला देवस्थान के संजय शुक्ला, बंडा मार्ग निवासी अजय पाठक भी डेंगू से पीड़ित हैं। दोनों का लखनऊ में इलाज चल रहा है। इसके अलावा भी तमाम लोग बुखार से परेशान हैं।