खास बात यह थी कि हत्या करने के बाद आरोपी राजवीर ने ही घटना के अगले दिन दो नवंबर 2000 को खुदागंज थाने में खुद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बाद में पकड़े गए अभियुक्त मदनपाल ने ही राजवीर का नाम खोला था।
राजवीर फत्तेपुर में पत्नी के साथ अपनी ससुराल में रहता था। साढ़ू कृष्णपाल भी अपने ससुर के कोई बेटा न होने के कारण ससुराल में ही रहता था। दोनों ही अपने ससुर की खेती की देखभाल करते थे और हत्या की वजह भी यह संपत्ति बनी। राजवीर ने जो रिपोर्ट लिखाई थी, उसमें उसने दूसरे लोगों को नामजद किया था। ये थे मदनापुर थाना क्षेत्र के गांव कपूरापुर निवासी झम्मन और बादशाह। राजवीर ने हत्या की वजह कृष्णपाल से पुरानी दुश्मनी होना बताया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि घर के बाहर चबूतरे पर सोते कृष्णपाल की झम्मन और बादशाह ने साथियों के साथ गोली चलाकर हत्या कर दी। मामला तो तब खुला था, जब तत्कालीन एसओ मान सिंह के हत्थे संदिग्ध अवस्था में घूमता एक व्यक्ति पकड़ा गया। पुलिस डायरी के अनुसार, पकड़े गए खुदागंज थाने के गांव पहाड़ीपुर भोपत के मदनपाल ने बताया था कि उसने राज खोला। इसके बाद 22 दिसंबर 2000 को राजवीर को पकड़कर उससे पूछताछ की।
राजवीर ने घटना स्वीकार करते हुए मदनपाल और अपने अलावा एक और साथी रामवीर का नाम बताया। रामवीर खुदागंज के गांव अभयपुर का रहने वाला है। वह भी 11 जनवरी 2001 को गिरफ्तार कर लिया गया। अब इन तीनों अभियुक्तों को सजा सुनाई गई है। वहीं झम्मन और बादशाह के नाम पहले ही पुलिस ने विवेचना में अपनी फाइल से निकाल दिया था। कोर्ट में सरकारी वकील सुनील सिंह ने तर्क रखे थे। उन्होंने कृष्णपाल की पत्नी संतोष के भी बयान कराए थे।