पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद को शिष्या से दुष्कर्म के आरोप मामले में हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। हाईकोर्ट ने चिन्मयानंद के खिलाफ अग्रिम आदेश तक इस मामले में कार्रवाई पर रोक लगा दी है। सुनवाई कर रहे सीजेएम कोर्ट में बुधवार को चिन्मयानंद के वकील ओम सिंह ने हाईकोर्ट के आदेश की प्रति दाखिल की। इसके बाद सीजेएम ने सुनवाई के लिए अब 22 नवंबर की तारीख तय की है।
चिन्मयानंद की एक शिष्या ने उन पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाते हुए नवंबर 2011 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। चिन्मयानंद ने हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे ले रखा था। दिसंबर 2017 में यह स्टे खत्म हो गया था। यूपी में भाजपा की सरकार बनने के बाद चिन्मयानंद के खिलाफ दर्ज मामले को राज्य सरकार ने धारा 321 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत वापस लेने को कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। सरकार के इस कदम पर पीड़ित पक्ष की ओर से आपत्ति की गई। पीड़ित पक्ष की आपत्ति पर सुनवाई के बाद सीजेएम ने चिन्मयानंद के खिलाफ 24 मई 2018 को पांच हजार रुपये का जमानती वारंट जारी करते हुए उनको 12 जुलाई को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था। चिन्मयानंद कोर्ट में पेश नहीं हुए। उन्होंने सीजेएम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण ली थी। सीजेएम ने सुनवाई के लिए 12 सितंबर तय कर दी थी।
बुधवार को सीजेएम शिखा प्रधान की कोर्ट में चिन्मयानंद के वकील ने हाईकोर्ट के आदेश की प्रति दाखिल की। हाईकोर्ट ने शिष्या से दुष्कर्म मामले में चिन्मयानंद के खिलाफ निचली अदालत की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। बुधवार को मामले में सुनवाई के बाद सीजेएम शिखा प्रधान ने अगली जारी 22 नवंबर तय कर दी है।