गर्रा नदी के पुल पर बाइक से गुजर रहे एक युवक का रविवार की शाम चायनीज मांझे से गला कट गया। गंभीर हालत में उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
थाना सदर बाजार क्षेत्र के मोहल्ला पक्का तालाब में रहने वाले विजय सक्सेना हथौड़ा चौराहा स्थित निर्माणाधीन कॉलोनी के एकाउंटेंट हैं। रविवार की शाम करीब छह बजे वह बाइक से बरेली मोड़ स्थित फर्म के पार्टनर किशन अग्रवाल के पास बाइक से कुछ कागजातों में हस्ताक्षर कराने जा रहे थे, तभी गर्रा पुल पर गुजरते समय वह चायनीज मांझे की चपेट में आ आए। मांझा उनकी गर्दन में फंस गया। जिससे उनकी गर्दन कट गई और वह बाइक समेत जमीन पर गिर पड़। गर्रा पुल पर सब्जी खरीदने आए मोहल्ला वाजिद खेल मोहम्मद शानू ने विजय को बाइक पर बैठकर कनौजिया मोड़ स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। गर्दन से निकल रहे खून से विजय के कपड़े लथपथ हो गए। डॉक्टरों ने आनन-फानन में विजय का ऑपरेशन किया। डॉक्टरों के मुताबिक गर्दन में 15 टांके आए है। सांस वाली नस थोड़ी सी बच गई। अगर वह कट जाती तो बचाना मुश्किल हो जाता। ऑपरेशन के बाद विजय की हालत में सुधार है।
चायनीज मांझा पर सरकार को प्रतिबंध लगाना चाहिए
चायनीज मांझे से देश में के कई हिस्सों में कई लोगों की मौत हो चुकी है। दो दिन पहले इलाहाबाद में भी चायनीज मांझे की चपेट में आकर एक युवक की मौत चुकी है। शहर में हुई घटना के बाद लोगों में आक्रोश है।
- चायनीज मांझे पर प्रतिबंध लगना चाहिए। स्वदेशी मांझे से कभी भी इस प्रकार की घटना नहीं हुई। चायना इस मांझे को भारत में निर्यात करके एक असलहा का काम कर रहा है। इस पूर्णरूप से प्रतिबंध लगना चाहिए।
- अनुज सिंह
- बाजार में चायनीज मांझे की भरमार है। देशी मांझा की ब्रिकी बंद हो गई। सस्ता और धारदार होने की वजह से पंतगबाजी के शौकीन ज्यादा पतंग काटने के लिए इस प्रयोग करते है। चायनीज मांझे पर प्रतिबंध लगना चाहिए।
- नीरज बाजपेयी
- चायनीज मांझा ने देशी बाजार पर कब्जा कर लिया है। यह बहुत की खतरनाक होता है। समाजसेवी संस्थाओं को आगे आकर चायनीज मांझे का विरोध कर लोगों को जागरूक करना चाहिए। इसके शिकार व्यक्ति की जान जा सकती है।
- गजेंद्र गंगवार
हमारे में प्रदेश और पड़ोसी जिला बरेली में देशी मांझा भारी मात्रा में बनता है। चायनीज मांझा बाजार में आने की वजह से इसे बनाने वाले लोगों की रोजीरोटी पर खतरा बढ़ गया है। चायनीज मांझा सस्ता और धारदार होने की वजह से लोग इसका प्रयोग करते हैं।
- सुचित सेठ
चायनीज मांझा फाइवर, नाइलोन और शीशा और केमिकल के प्रयोग से बनाया जाता है। इन चीजों के प्रयोग मांझा बहुत धारदार हो जाता है। इसकी चपेट में आकर लोगों की गर्दन कट जाती है। यह एक धारदार ब्लेड की तरह हो जाता है। इसके शिकार हुए लोगों की जान भी जा सकती है। चायनीज मांझे पर सरकार को प्रतिबंध लगाना चाहिए।
- डॉ. रवि मोहन