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बॉयलर स्टीम लीकेज होने से झुलसे तीन मजदूर, एक गंभीर

Sat, 20 Jun 2015 09:05 PM IST
शाहजहांपुर/रोजा।
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बरतारा की एमएन फर्निश ऑयल मिल में शनिवार को बॉयलर लीक होने से तीन मजदूर झुलस गए। तीनों को शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जिसमें से एक की हालत गंभीर बनी हुई है। यह मिल पहले एमएन एग्रो राइस मिल थी जो पिछले कई सालों से बंद पड़ी है।
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पुलिस के मुताबिक ऑयल मिल में टायरों को जलाकर उनका तेल निकालने, वायर स्क्रैप्स और टार्च के सेल बनाने के लिए मसाला तैयार करने के अलावा, जलाने के लिए टायर की राख के गुल्ले बनाने का काम होता है। इस काम के लिए फायर सर्विस विभाग से कोई एनओसी नहीं लगी गई है।      
थाना क्षेत्र के बरतारा स्थित एमएन फर्निश ऑयल मिल में शनिवार की सुबह साढ़े सात बजे काफी संख्या में मजदूर काम कर रहे थे। इनमे निगोही क्षेत्र के गांव ऊनकलां निवासी 40 वर्षीय रामू पंडित और मोहम्मदी (लखीमपुर खीरी) गांव सिसौरा निवासी 45 वर्षीय बहारे चमन हीट अप बॉयलर के पास काम कर रहे थे। मिल के सुपरवाइजर अमित गुप्ता ने पुलिस को बताया कि बॉयलर का एक दरवाजा अचानक खुल गया और प्रेशर से स्टीम बाहर ओर निकले लगी। जिसकी चपेट में आकर दोनों मजदूर झुलस गए। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सुपरवाइजर अमित गुप्ता और प्रबंधक रामदास ने मिल के सारे दरवाजे बंद करा दिए। घायलों को एक वाहन से शहर के एक निजी अस्पताल में भेज दिया। डॉक्टरों ने घायल बहारे चमन की हालत गंभीर बताई है।
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कई मौत की सूचना पर मचा हड़कंप
घटना के बाद इलाके में खबर फैल गई हादसे में कई लोगों की मौत हो गई है। जिसकों छिपाने का मिल प्रबंधन प्रयास कर रहा है। इसकी भनक लगते ही रोजा थाने में समाधान दिवस पर बैठे तहसीलदार ओंकार नाथ वर्मा, लेखपाल नेत्रपाल और रोजा पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई। पूर मिली की गहनता से तलाशी ली गई, लेकिन किसी के मरने की पुष्टि नहीं हो सकी।

सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई। बॉयलर लीकेज से तीन मजदूर झुलस गए। मिल प्रबंधन ने तीनों को शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया है। सूचना प्रशासनिक अधिकारियों को दे दी गई है।    - आरएन चौधरी, प्रभारी निरीक्षक, रोजा

काम के दौरान बॉयलर से लीकेज होने लगा था। जिसको बंद करने के प्रयास में मिल के दो लोग गंभीर रूप से झुलस गए। जिनका इलाज कराया जा रहा है। घायलों के परिवार वालों को सूचना दे दी गई है।                       - अमित गुप्ता, मिल सुपरवाइजर,बरतारा

ऑयल मिल प्रबंधन के पास नहीं कोई एनओसी
रोजा। बरतारा स्थित एमएन फर्निश ऑयल मिल, जो कभी एमएन एग्रो राइस मिल के नाम से प्रचलित थी। मिल प्रबंधन के के पास ऑयल मिल चलाने की कोई एनओसी नहीं है।
मिल में टायर को जलाकर तेल निकालने, उसकी राख से टार्च के सेल बनाने, स्कैप्स के अलावा जलाने के लिए टायर की राख से गुल्ले बनाने का काम चल रहा था। मिल में इतना खतरे से भरा काम हो रहा है, लेकिन वहां आग से निपटने के लिए न तो पानी का इंतजाम है न ही अग्रिशमन यंत्र लगे हैं। इस मामले में सीएफओ तेजवीर सिंह ने बताया कि विभाग की तरफ से कोई एनओसी नहीं जारी की गई है। बता दें कि इस तरह के कारखाने को चलाने के लिये  फायर सर्विसेज, विद्युत सुरक्षा अनुभाग, जिला उद्योग केंद्र, पर्यावरण बोर्ड के अलावा जिला परिषद से एनओसी लेना जरूरी होता है। जो कि मिल प्रबंधन के पास मौजूद नहीं था। पुलिस को आशंका है कि पूरा कारखाना ही अवैध रूप से चल रहा है। जिसमें सरकारी टैक्स बचाने के लिए बड़ा खेल हो रहा है। इस सभी पहलुओं की रोजा पुलिस ने एसडीएम सदर और श्रमायुक्त को सूचना दे दी है।

मजदूरों को कमरे में बनाया बंधक
बरतारा की ऑयल मिल में मजदूरों के झुलसने के बाद मिल प्रबंधन ने घटना को छिपाने के सारे प्रयास किए।  इतना ही नहीं सुबह साढ़े सात बजे की घटना को पूरी तरह से छिपाये रखा। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन हरकत में आया। दिन में करीब 11 बजे पुलिस ने मौके पर पहुंची और मिल का दरवाजा खटखटाया, दरवाजा नहीं खुलने पर पुलिस कर्मी दरवाज कूद कर अंदर घुसे और दरवाजा खोला। मिल के अंदर संन्नाटा पसरा हुआ था। हादसे में मजदूरों के मरने की सूचना पर पुलिस ने तलाशी शुरू कर दी। मिल के पिछले हिस्से में बने कमरे में करीब 12 मजदूर बंद मिले। पूछताछ में किसी भी मजदूर ने कुछ भी नहीं बताया है। पुलिस जांच कर रही है कि आखिर मिल प्रबंधन से घटना के बाद गेट क्यों बंद कर दिया। साथ ही मजदूरों को कमरे में बंधक क्यों बनाया।

वायू प्रदूषण से ग्रामीण परेशान
बरतारा में ऑयल मिल चोरी-छुपे चलाया जा रहा है। मिल से निकलने वाले काले धुएं से आसपास के ग्रामीणों के घरों में काली राख गिरती है। जिससें ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी फर्क पड़ रहा है।

एक साथ चल रहे चार कारखाने
बरतारा ऑयल मिल मे घटना के बाद वहां पहुंची पुलिस और तहसीलदार ने टायरों का जखीरा देखा तो दंग रह गये । मिल के मजदूर वकील अहमद निवासी जमुरा थाना शाहबाद ने पुलिस को बताया कि एक बॉयलर को भरने में हजारों की संख्या में टायर भरे जाते हैं। जिसमें टयरों को हीट अप कर गलाया जाता है। जिससे टायरों से तेल निकाला जाता है जो कोलतार बनाने का काम आता है।  टायरों से निकलने वाला तार स्क्रैप्स के रूप मे बिकता है। टायर की राख सेल बनाने के काम में आती है।
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