जैतीपुर थाना क्षेत्र के गांव बझेड़ा भगवानपुर में शुक्रवार दोपहर आग लगने से 13 छप्परदार घर जल गए। सूचना दिए जाने के बाद भी शाम तक फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर नहीं पहुंचीं। जिनके घर जलकर राख हुए हैं, उनके पास तन पर पहना हुआ कपड़ा ही बचा है।
बताते हैं कि घरों के पुरुष हरियाणा और मेरठ में मजदूरी करते हैं। हादसे के वक्त महिलाएं खेतों पर धान काटने गई थीं। शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ बजे अचानक झोपड़ियों में आग लग गई। आग इतनी भयानक थी कि लोगों को अपने जानवर बचाना मुश्किल हो गए। घरों में खाने पीने की वस्तुएं जलकर राख हो र्गइं। किसी भी महिला और बच्चे के कपड़े भी न बच सके। परिवार की महिलाओं का रो-रो कर बुरा हाल है। गांव वालों की कड़ी मशक्कत के बाद तीन घंटों में आग पर काबू पाया गया, लेकिन प्रशासन की उदासीनता के चलते सूचना मिलने के बाद भी शाम तक फायर ब्रिगेड नहीं भेजी गई। इस आग में जानवर भी झुलस गए।
बता दें कि वर्ष 2012 में आई भीषण बाढ़ में लोहर गड़ी के 45 परिवारों को प्रशासन ने बझेड़ा भगवानपुर के खलिहान की भूमि पर लाकर बसा दिया था। तब से उक्त परिवार यहां झोपड़ी डाल कर रह रहे हैं। इन लोगों की बदकिस्मती है कि पिछले वर्ष भी इनके घर जल गए थे। आग से गांव के चिराग अली, याद अली, कल्लू, जाविद, राविद, इस्लाम, सलीम, हनीफ , आले हुसैन, काले, फकीरे आलम, गोमिद के घर जल गए।