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जिसने भी शव देखे दहल उठा कलेजा

Wed, 29 Apr 2015 11:32 PM IST
पुवायां (शाहजहांपुर)
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रामलड़ैते और उनकी पत्नी प्रभा की मौत की जानकारी पाकर गांव के तमाम लोग मौके पर जा पहुंचे, लेकिन दोनों की हालत देखकर मजबूत कलेजे वाले लोग भी कांप उठे। हत्यारों ने दोनों को इतनी बेरहमी से कत्ल किया था कि लोग शव देखकर दहल गए।
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गांव के लोग जब मौके पर पहुंचे तो घर में चीख पुकार मची हुई थी। जिस चारपाई पर दंपति लेटे थे, उसके नीचे खून ही खून बिखरा हुआ था। पास की दीवार पर मांस के लोथड़े चिपके हुए थे। प्रभा देवी के सीने से लेकर शरीर पर धारदार हथियार के तमाम जख्म थे। उनसे खून बह रहा था। दोनों के कपडे़ खून से पूरी तरह लथपथ थे। शव देखने के बाद कई लोग तो गश खाकर गिर पड़े। पुलिस ने बताया कि प्रभा के तीन और रामलडै़ते को दो गोली मारी गईं थीं। दोनों के शरीर पर धारदार हथियार के निशानों के आधार पर पुलिस अनुमान लगा रही है कि प्रहार एक ही हथियार से किए गए हैं। गोली लगने के बाद चारपाई के नीचे जमीन में जा धंसी। दीवार से भी तीन गोलियों का अगला हिस्सा मिला है।
रामलड़ैते के कमरे से पौनिया तमंचा मिलने के बाद पुलिस ने उनके दूसरे कमरे का भी ताला तुड़वाकर तलाशी ली, लेकिन कोई संदिग्ध वस्तु हाथ नहीं लग सकी। घर के पास गीले खेत में हमलावरों के पैर के निशान भी मिले हैं।
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खोजी कुतिया लूसी पहुंची स्कूल और रामबिहारी के घर
पुवायां। दोहरे हत्याकांड की जानकारी मिलने के बाद अधिकारियों ने डॉग स्क्वायड और फोरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया। फोरेंसिक टीम ने खून के नमूनों के अलावा कई स्थानों से उंगलियों के निशान आदि लिए। खोजी कुतिया लूसी ने रामलड़ैते के यहां से एक पौनिया तमंचा बरामद कराया। इसके बाद शव को सूंघकर प्रभारी नीत प्रकाश के साथ गांव के प्राथमिक स्कूल के पास पहुंची। इसके बाद लूसी गांव के रामबिहारी के घर जा पहुंची। रामबिहारी कुछ माह पूर्व हत्या के मामले में जेल से अपील पर छुटा है। वह दोहरे हत्याकांड में नामजद भी कराया गया है। रामबिहारी घर पर नहीं मिला।
 
घर का दरवाजा नहीं होता था बंद
पुवायां। हत्या के मुकदमे और जिला बदर होने के बाद रामलड़ैते का भाई शिवशंकर पूरी तरह चौकस रहता था और सतर्कता के नाते हमेशा छत पर ही सोता था, लेकिन उसने कभी भी घर के मुख्य गेट के पास लगे लोहे के छोटे गेट पर ध्यान नहीं दिया। यह गेट अंदर से बंद नहीं होता। इसे ईंट लगाकर भिड़ा दिया जाता था। बताया जाता है कि हमलावरों को इसकी जानकारी थी। कुछ हमलावर इसी दरवाजे से और कुछ दीवार फांदकर अंदर घुसे। शिवशंकर की पत्नी रन्नो देवी ने बताया कि उसने रामलड़ैते और प्रभा से कमरे के अंदर सोने को कहा था, लेकिन गर्मी के कारण दोनों बाहर ही सो गए।
 
शिवशंकर से भी हुई पूछताछ
पुवायां। मृतक रामलड़ैते के भाई शिवशंकर की शर्ट की बांह पर पड़ी खून की फुहार ने पुलिस को असमंजस में डाल दिया। शक की निगाह शिवशंकर की ओर घूमी तो पुलिस ने उससे भी पूछताछ की। शिवशंकर ने बताया कि हत्या के बाद भाई को उठाते समय उसकी शर्ट पर खून लगा है। इस पर पुलिस ने पूछा कि घायल को उठाते समय शर्ट पर खून का धब्बा सा बनना चाहिए। खून का फव्वारा तब बनता है, जब घायल होते समय कोई पास हो और खून तेजी से निकलकर कपड़ों पर गिरे। शिवशंकर इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
 
लगा आज नहीं बच सकेगी जान
मैं कमरे के अंदर सो रही थी। फायर की आवाज के साथ ही चाची की चीख सुनाई दी। वह कह रही थी कि उन्हें मार दो, लेकिन पति की जान न लो। इसके बाद कई फायर और हुए। लगा कि आज परिवार में कोई भी नहीं बच सकेगा। हमलावरों के जाने के बाद मां ने दरवाजा खोलने को कहा, लेकिन डर के कारण हिम्मत नहीं पड़ी। बाद में गांव के तमाम लोगों की आवाज सुनी तो दरवाजा खोला। बाहर चाचा, चाची खून से लथपथ मृत पड़े थे। - राखी, मृतक रामलड़ैते की भतीजी
 
दो लोग खड़े रहे सिर पर
गोली की आवाज सुनकर आंख खुली तो मैं चारपाई पर उठ बैठी। रामलडै़ते और प्रभा कुछ ही दूरी पर लेटे थे। चारपाई से उठते ही दो लोगों ने तमंचा तान कर चुप रहने को कहा और पति शिवशंकर के बारे में पूछा। मैंने बता दिया कि पति बाहर गए हैं। इसके बाद हमलावरों ने देवर और देवरानी को मार दिया।
- रन्नो देवी, रामलड़ैते की भाभी
 
पिता ने छत से छलांग लगाकर बचाई जान
फायर की आवाज होते ही पिता ने ललकारा तो किसी ने छत की ओर फायर कर दिया। इस पर पिता से छत से छलांग लगाकर जान बचाई। मैं छत पर ही दुबका रहा। हमलावर छह से सात लोग थे। उन्होंने चाचा, चाची की निर्ममता से हत्या कर दी।
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- अनुज कुमार, रामलड़ैते का भतीजा
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