सोमवार दोपहर ऑनर किलिंग की घटना में सगे भाइयों ने जिस बहमनी चौकी गांव में अपनी छोटी बहन 18 वर्षीया फूलजहां का सिर कलम कर दिया था, मंगलवार को वहां मातमी सन्नाटा पसरा था। गांव के जिस हिस्से में यह वाकया हुआ वहां निर्धन तबके वालों की रिहायश है। खासकर मुस्लिम समुदाय के धुना (रुई धुनने वाले) के बहुसंख्य में रहते हैं। यहां पहुंचने एकाएक ग्रामीण जुटे लेकिन उस बिना किवाड़ वाले घर या आंगन में कोई न था जिसमें फूलजहां का परिवार रहता है। बताया गया कि कुछ देर पहले इलेक्ट्रानिक मीडिया वाले आए थे तब भी ऐसा मजमा लग गया था। अबकी भी वही नजारा है। सभी पूरे वाकये के बारे में अलग - अलग बार किस्सा सुनने को लालायित हैं लेकिन खुद कुछ बताने से हिचकते हैं।
अचानक की भीड़ के पीछे से एक उम्रदराज महिला नीले रंग वाले सलवार सूट में सिर और चेहरे को ओढनी से ढके हुए सामने को आईं लेकिन सिर झुकाए चुपचाप खड़ी हो गई। लोगों ने बताया कि यह फूलजहां की अम्मा हैं। नाम पूछने पर एक बार उन्होंने भीड़ पर नजर डाली और कहा कि सुशीला। चौंकना लाजिमी था। वह समझ गईं और अपने आंगन को बढ़ते हुए बोलीं कि यही राशन कार्ड में भी दर्ज है। फिर धीरे - धीरे बातचीत के क्रम में वह बताने लगीं कि उनके कुल 11 संताने हैं। फूलजहां अकेली बेटी नहीं थी बल्कि चार बहनें थीं। दो बड़ी बहने आसमीन और रियासमीन का पहले ही निकाह हो चुका है। तीसरी असरजहां के बाद फूलजहां चौथे नंबर की थी। करीब 20 दिन पहले उसने इन्हें पहली बार पड़ोस में रहने वाले फुफेरे भाई अच्छन से मोहब्बत होने का जिक्र किया और निकाह कराने की बात की। तब यह हैरत में पड़ीं और परिवार के दूसरे सदस्यों को इस बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि बड़ी से पहले इसका निकाह कराने का पाप न करने का वास्ता देकर उसे समझाया कि दोनों का निकाह एक साथ कराएंगे। लेकिन वह न मानी। इस बीच जुम्मे को दिल्ली से आए गुल हसन और शनिवार को आए नन्हूं ने अच्छन से रिश्ते कराने की बात सिरे से खारिज कर दी। रविवार को उसी बात पर घर में काफी कलह मचा लेकिन वह न मानी और अचानक ही अच्छन के घर भाग गई।
दहशत में है अच्छन की मां अनीसा
बहमनी चौकी (परौर)। फूलजहां के प्रेमी फुफेरे भाई अच्छन के घर पर मंगलवार को सन्नाटा था। घर की चाहरदीवारी बिना किसी किवाड़ के खुली थी। भीतर मकान के कमरों के दरवाजे बंद थे। ग्रामीणों की भीड़ ने अच्छन की मां अनीसा को बुलवाया तो वह सहमे और दहशतजदां हाल में हौले - हौले सामने आईं। पूछने पर बताया कि इन्हें तो इस आशिकी का सोमवार की सुबह पता लगा। रात को न जाने फूलजहां कब आई और छत पर सो रहे अच्छन के पास थी। सोमवार सुबह भाईजान के लड़कों ने हंगामा काटते हुए संदेशा भिजवाया तो यह अवाक रह गईं। छत पर सही में फूल को देखकर यह बिफर उठीं। उसे तुरंत अपने घर भाग जाने को कहा लेकिन वह राजी ही नहीं थी। दिन भर हिलहुज्जत जारी रही। दोपहर में अचानक गुल हसन और नन्हूं तमतमाए हुए दहलीज से भीतर को आए और अपनी बहन को मारना - पीटना शुरू कर दिया। इन्होंने मना किया और कहा कि इनके घर में कोई मार - पिटाई न की जाए बल्कि चुपचाप अपनी बहन को लिवा जाएं। उसके बाद दोनों उसे घसीटते हुए ले गए और गली में पटककर उसका गला काट डाला।
सन्न हैं गांव वाले भी
बहमनी चौकी। सोमवार दोपहर की घटना से पूरा बहमनी चौकी गांव ही स्तब्ध है। सभी सन्न है कि आखिर ऐसा कैसे और क्यूं हुआ। प्रधान साजिद अली ने कहा कि मुस्लिम बहुल इस गांव में कभी ऐसा वाकया नहीं हुआ। करीब 1500 की आबादी वाले इस गांव में मुस्लिमों की आबादी कुल करीब 800 है और इसमें आधे पठान एवं आधे धुना बिरादरी से हैं। धुना बिरादरी वाले यहां मंसूरी के नाम से भी जाने जाते हैं। घटना के समय यह गांव में नहीं थे और बाद में पहुंचे इसलिए वाकए की सच्चाई से ज्यादा वाकिफ नहीं हैं।
गांव के युवक सलमान ने दोनों परिवारों के घरों के बीच वह गली दिखाई जहां सोमवार को घटना हुई थी। बताया कि घटना के बाद हुई बारिश के चलते हुआ जलभराव अभी सूखा नहीं है। उसी जलभराव में मौके पर गिरा खून भी बह गया या मटमैले पानी में घुल गया। यहीं मौजूद इरशाद और समीर अली ने बताया कि सिर काटने के बाद दोनों भाई गांव में किसी से नहीं मिले एवं कटा हुआ सिर लेकर सीधे पूरब की ओर से खेतों में भाग गए। उसके बाद से कुछ पता नहीं। हां, इनके घर में तांगा खींचने के काम आने वाले दो घोड़े बंधे थे, वे भी अब नहीं दिख रहे।
वारदात से पहले दोनों भाइयों ने शराब पी थी
शाहजहांपुर। फूलजहां के धड़ का पोस्टमार्टम कराने के लिए बहमनी चौकी गांव से साथ आए चौकीदार महेश कुमार और जान मोहम्मद ने बताया कि गुल हसन और नन्हूं ने घटना से पहले शराब पी थी। वे नशे में गाली गलौज करते हुए अच्छन की घर को बढ़े थे। सुबह से ही दोनों के तेवर खतरनाक थे। पिता फौजदार को भी अपने पर इनसे हमला होने का डर था और उसी चलते वह सुबह ही परिवार के अन्य सदस्यों के साथ घर से निकल गए थे।