कोतवाल रूम सिंह यादव द्वारा छापामार कर गत वर्ष सात सितंबर को हाईवे किनारे टैंकरों से अल्कोहल चोरी की सूचना मिलने पर चार टैंकर कब्जे में लिए गए थे। इस दौरान इस घालमेल में खाकी की संलिप्तता भी उजागर हुई थी। तिलहर कोतवाली के एक एसआई सहित 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। अस्सी हजार लीटर अल्कोहल भरे टैंकर कोतवाली में आ गए। कोतवाल रूम सिंह यादव की सख्ती के बावजूद चोरी छिपे कोतवाली से भी अल्कोहल निकलने का सिलसिला जारी रहा। कोतवाल की सख्ती भी पुलिस कर्मियों पर अंकुश नहीं लगा पाई। चर्चा तो टैंकरों में मौजूद 25 प्लेट के तीन बैट्रों, दो डेक, व्हील पाना और चार जैक के गायब होने की भी रही, लेकिन इसकी पुष्टि ट्रांसपोर्ट कंपनी के मालिक नसीम अख्तर द्वारा नहीं की गई। हालांकि पुलिस कस्टडी के बाद भी हजारों लीटर अल्कोहल टैंकरों से गायब होता रहा, जिसका सीधा फायदा शराब माफिया को मिलता रहा। स्थानीय पुलिस कर्मियों में धड़ेबाजी अगर खुलकर सामने न आती तो कोतवाली में जब्तशुदा वाहनों व अन्य सामग्री से छेड़छाड़ का भांडा न फूटता। सूत्रों का कहना है कि यदि मालखाने सहित जब्तशुदा सामग्री का भौतिक सत्यापन हो तो और भी तथ्य खुलकर सामने आ सकते हैं।