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यहां तो हर नदी से हो रहा अवैध रेत खनन, जिम्मेदार खामोश

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शाहजहांपुर। जिले में सक्रिय रेत माफियाओं पर शासन की नई खनिज व भंडारण नियमावली भी बेअसर साबित हो रही है। जिले की शायद ही कोई नदी व घाट ऐसा बचा हो जहां चोरी छुपे अवैध खनन नहीं हो रहा हो। यही नहीं रेत के कारोबार से जुड़े लोगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वह न सिर्फ बिना लाइसेंस रेत खनन करते हैं बल्कि विभिन्न स्थानों पर बिना लाइसेंस उसका भंडारण कर वहीं से उसकी बिक्री भी कर रहे हैं। जबकि जिले में गर्रा के किनारे दो स्थानों पर रेता खनन का ठेका हुआ है और 100 घन मीटर रेता भंडारण के भी सिर्फ दो लाइसेंस हैं। यह हाल तब है कि जब प्रदेश सरकार ने 31 दिसंबर को नई खनिज भंडारण नियमावली को और सख्त बनाया है, लेकिन उसका पालन कराने वालों की कथित मिली भगत के चलते जिले में यह अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। सड़कों के किनारे जहां-तहां रेत के लगे ढेर इसकी खुद गवाही देते दिखाई देते नजर आते हैं।
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यहां बिना लाइसेंस हो रहा खनन, बेचने वाले कहते ठेका है
जलालाबाद तहसील के कोला गांव में रामगंगा व बहगुल नदी से और इसी तहसील में चितरऊ बहगुल घाट पर खनन चोरी छुपे होता है। तिलहर तहसील मेें करीब एक दर्जन ठिकानों पर अवैध खनन जारी है। गर्रा के किनारे घुसगवां समेत बिरसिंगपुर, चक बरैंचा और सफौरा। निगोही क्षेत्र में कठिना नदी के किनारे बसे कुकहा महमूदपुर, ऊन कलां, विक्रमपुर चकौरा और इटौआ में बड़े पैमाने पर नदियों से खनन किया जा रहा है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अवैध खनन कर कमाई में जुटे लोग अपने को ठेकेदार बताते हैं, लेकिन जब उनसे रेत की रसीद मांगी जाती है तो मना कर देते हैं। गत वर्ष अफसरों की सख्ती के बाद खुदागंज क्षेत्र में कुचई घाट पर तो अवैध खनन थम गया है, लेकिन जैतीपुर में बहगुल को छलनी करने वाला रैकेट अभी भी सक्रिय है।

पुवायां में रेत के साथ मिट्टी खनन भी हुआ तेज
खनन माफिया का गढ़ बने पुवायां तहसील क्षेत्र में रेता खनन पर पुलिस की सख्ती के बाद धंधे से जुड़े लोगों ने सिंधौली, खुटार और बंडा के नदी घाटों की ओर रुख मोड़ लिया है। खुटार के गांव पकड़िय़ा हकीम के पास गोमती तट, गांव मैनिया, गांव टाह खुर्द कलां के पास, बंडा मार्ग पर झुकना, गोमती के सुनासिर घाट, मंसाराम घाट, मझरिया घाट और सिंधौली में शारदा नहर आदि से रेत खनन चोरी छिपे जारी है। यही नहीं, खुटार क्षेत्र के गांव चमराबोझी के पास सरकारी जमीन से मिट्टी खनन भी धड़ल्ले से हो रहा है।
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दोगुने शुल्क पर तीन साल को मिलेगा रेता भंडारण लाइसेंस
जिला खनन अधिकारी डॉ. अभय रंजन ने बताया कि 100 घन मीटर रेता भंडारण के लिए अभी तक दस वर्ष की अवधि का लाइसेंस पांच हजार रुपये शुल्क लेकर जारी होता था, लेकिन नई नियमावली के अनुसार नए भंडारण लाइसेंस तीन साल की अवधि के लिए दस हजार रुपये शुल्क लेकर जारी होंगे। हालांकि, अवधि पूरी होने पर दो साल के लिए लाइसेंस रिव्यू कराया जा सकेगा। साथ ही लाइसेंसी को चरित्र और हैसियत प्रमाण पत्र भी देना होगा। नियत मात्रा से अधिक भंडारण करने की दशा में लाइसेंसी को विभाग की वेबसाइट पर त्रैमासिक विवरणी अपलोड करनी होगी। खनन अधिकारी के इन प्राविधानों से अवैध खनन पर रोक लगाना आसान होगा।

वर्तमान में रेता खनन का सिर्फ एक पट्टा मुख्यालय के गर्रा घाट स्थित ककरा काकर कुंड में संचालित है। दूसरा पट्टा संबंधित लाइसेंसी द्वारा समय से शुल्क जमा नहीं करने पर निरस्त हो चुका है। ककरा काकर कुंड से नियमानुसार रेत खनन किया जा रहा है। शासन की मंशा के अनुरूप ऐसे ठिकाने कार्रवाई के लिए चिन्हित किए जा रहे हैं, जहां से अवैध खनन की शिकायतें मिल रही हैं।
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अंबरीष कुमार श्रीवास्तव, एडीएम (वित्त एवं राजस्व)
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