रोजा (शाहजहांपुर)। बरेली-लखनऊ रेलमार्ग पर कौढ़ा स्टेशन के पास वाराणसी एक्सप्रेस पर शरारती तत्वों ने पत्थरबाजी कर दी। जिसमें लोको पायलट गंभीर रूप से घायल हो गया। सहचालक किसी तरह से साथी को संभालते हुए ट्रेन को हरदोई ले गया। चालक को हरदोई जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां से उसे केजीएमसीयू रेफर कर दिया गया। बाद में अस्पताल पहुंचे परिजन घायल चालक को राममूर्ति हास्पिटल बरेली ले गए। इस दौरान करीब तीन घंटे तक क्यू न होने के कारण एक्सप्रेस ट्रेन को हरदोई में रोके रखा गया है।
यह वाक्या मंगलवार की शाम साढ़े सात बजे का है। रोजा मुख्यालय के चालक जीके मिश्रा अपने सहायक विजय कुशवाहा के साथ ट्रेन का संचालन कर रहे थे । सहायक विजय कुशवाहा ने अधिकारियों को बताया कि कौढ़ा स्टेशन से पहले नो मैन क्रासिंग संख्या 285 के पास कुछ शरारती तत्वों ने ट्रेन पर एक कपड़े में बांधकर पत्थर फेंके।
कुशवाहा के अनुसार कपड़े में पत्थरों से भरे कुछ पत्थर लोको पायलट जीके मिश्रा को लगे, जिससे उनकी नाक, आंख से खून बहने लगा। उनकी हालत को देखते हुए सहचालक विजय ने घायल लोको पायलट को संभाला और ट्रेन को हरदोई तक ले गए। वॉकी-टॉकी पर कौढ़ा स्टेशन मास्टर के जरिये सूचना उच्च अधिकारियों को दी। हरदोई ट्रेन पहुंचने पर रेलवे के डॉक्टर और आरपीएफ के जवानों ने मदद करते हुए घायल चालक को जिला अस्पताल हरदोई पहुंचाया, जहां हालत गंभीर देखते हुए उन्हें केजीएमसीयू लखनऊ रेेफ र किया गया । सूचना पर पहुंचे लोको प्रभारी हरकुमार त्रिवेदी और घायल चालक के बेटे आदेश मिश्रा ने उन्हें राममूर्ति अस्पताल बरेली में भर्ती कराया है, जहां चालक की हालत स्थिर बताई जा रही है। ट्रेन का संचालन कर रहे चालक और सहचालक हरदोई स्टेशन को मेमो देकर अस्पताल चले गए, जहां तीन घंटे बाद बालामऊ से मालगाड़ी के चालक आशुतोष चतुर्वेदी को भेजकर वाराणसी एक्सप्रेस को गंतव्य के लिए रवाना किया गया।
एंबुलेंस तक नही दे सकी रेलवे
रोजा। घायल लोको पायलट जीके मिश्रा को रेलवे एक अदद एंबुलेस तक नही दिला सकी। लिहाजा उन्हें निजी आटो से उनके सहायक ले गए और हरदोई जिला अस्पताल में भर्ती कराया।
पत्थरबाजी से अब तक आठ लोको पायलट हो चुके घायल
पिछले सालों में ट्रेन पर पत्थरबाजी की कई घटनाएं हो चुकीं हैं, जिनको रोकने के लिये रेलवे के पास कोई पुख्ता इंतजाम नही है। न ही रेलवे की सुरक्षा एजेंसियां ऐसे मामलो को गंभीरता से लेती हैं। लोको प्रभारी एचके त्रिवेदी बताते है बीते सालों में आठ लोको पायलटों को ट्रेन संचालन के समय पत्थरवाजी का शिकार होना पड़ा है।