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राजनीति में आने के बाद विवादों में घिर गई कोयलगिरी

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राजनीति में आने के बाद विवादों में घिर गई कोयल गिरि
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एक के बाद एक दर्ज होते चले गए मुकदमे, जेल भी जाना पड़ा
फर्जी वसीयत मामले में भी मुकदमा कायम पर बढ़ गईं थी उलझनें
अमर उजाला ब्यूरो
तिलहर। पीस पार्टी से वर्ष 2012 में तिलहर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के साथ ही राजनीति में कदम रखने के बाद साध्वी सीमा वर्मा उर्फ कोयल गिरि विवादों में घिरती चली गईं। उनके खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी वसीयत कराने के मामले दर्ज हो गए। यहां तक कि उन्हें जेल भी जाना पड़ा। इस समय वह फर्जी वसीयत के एक मामले में आरोपी होने पर कोर्ट से स्टे के कारण गिरफ्तारी से बची हुईं थीं। बरेली में साध्वी की हालत नाजुक बनी हुई है।
विधानसभा का चुनाव हारने के बाद उन्होंने कौशल विकास सेंटर खुलवाने के लिए लोगों से संपर्क किया। तो उन पर रुपये हड़पने के आरोप लगने शुरू हो गए। वर्ष 2016 में उनके खिलाफ सदर बाजार कोतवाली में धोखाधड़ी आदि धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। वहीं तिलहर कोतवाली में भी उनके खिलाफ वर्ष 2017 में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। उन पर चेक पर बैंक प्रबंधक के फर्जी साइन बनाकर आठ लाख रुपये निकालने का भी आरोप लगा। इसी के साथ ही वह विवादों में घिरती चली गईं और उन पर कंप्यूटर सेंटर दिलाने के नाम पर 29 लाख 57 हजार चार सौ रुपये हड़पने का आरोप लगा। फिर एक और मुकदमा तिलहर थाने में दर्ज हुआ। सदर पुलिस द्वारा जेल भेजे जाने के दौरान उन पर वर्ष 2018 में वह फर्जी वसीयत कराने के मामले में भी फंस गई और उन पर मुकदमा दर्ज करा दिया गया। इस तरह विवादों में घिरने के साथ ही उनके विरोधियों की संख्या बढ़ती चली गई। हालांकि साध्वी अपनी बेगुनाही साबित करने को शिद्दत से लड़तीं रहीं। इन्हीं विवादों की वजह से वह इन दिनों कुछ ज्यादा ही तनाव में आ गईं थीं।
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पुलिस ने शुरू की जांच, दर्ज किए बयान
घटना की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मामले की जांच इंस्पेक्टर अशोक पाल ने शुरू कर दी है। रविवार को वह दोबारा साध्वी के घर पहुंचे और यहां उन्होंने आसपास के लोगों के बयान दर्ज किए। वहीं एक पुलिस टीम साध्वी का बयान लेने के लिए बरेली अस्पताल भी भेजी गई है।
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आरोपी खुद को बता रहे बेगुनाह
पंकज गुप्ता ने एसडीएम मोईन-उल-हक के सामने अपना पक्ष रखते हुए विवादित जमीन पर अपना हक बताया है। उन्होंने बताया कि बताया कि हिंदू पट्टी निवासी रामेश्वर सहाय ने अपना हक जताते हुए मुकदमा किया था, जिसमें 1998 में न्यायालय ने गुण दोष पर रामेश्वर दयाल का मुकदमा खारिज कर दिया था। बाद में दौरान मुकदमा सीमा वर्मा की मां रामलली ने भूखंड पर कब्जा दखल हस्तक्षेप किया। जिसे न्यायालय ने उचित नहीं माना। बाद में मेरे पिता रामनिवास गुप्ता व ताऊ भगवान दास आदि ने 13 जनवरी 2012 को भूखंड को रजिस्ट्री कराकर खरीद लिया। दोनों पक्ष इस जमीन पर अपना-अपना हक जता रहे हैं। मुकदमा कोर्ट में विचाराधीन है।
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मेरी पंकज गुप्ता से मोबाइल पर बात हुई थी और उन्होंने अभिलेख दिखाने को कहा था लेकिन मैंने कह दिया कि विवेचक को दिखाओ। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मोईन-उन-इस्लाम, एसडीएम तिलहर
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