फोटो-21,खुटार में खेत में जल रही पराली
पुवायां में जलाई जा रही पराली
रोक और जुर्माने के बाद भी नहीं मान रहे किसान
अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां। पर्यावरण को नुकसान को देखते हुए पराली जलाए जाने पर रोक है, लेकिन कुछ लोग खेतों में पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। कई स्थानों पर आग से पड़ोस के खेत स्वामियों का भी नुकसान हो चुका है।
गौरतलब है कि पराली से हो रहे प्रदूषण के कारण इसके जलाए जाने पर रोक लगा दी गई है और तमाम किसानों पर 2500 से लेकर 15 हजार का जुर्माना तक लगाया जा चुका है, लेकिन इसके बाद भी कई किसान पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं और खेतों में पराली धड़ल्ले से जलाई जा रही है।
पुवायां में धान की फसल पूरी तरह से कट चुकी है और धान के खेतों में आलू की फसल भी जम चुकी है, लेकिन गेहूं बोने वाले कुछ किसान अभी भी पराली जला रहे हैं। पराली से केवल पर्यावरण ही दूषित नहीं हो रहा है, बल्कि जमीन को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। बार बार आग लगाने से न सिर्फ मित्र कीट नष्ट हो रहे हैं, जमीन भी ऊसर हो रही है।
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पराली जलाने से गन्ने में आग लगी
पुवायां। गांव कनपारा निवासी शरद सिंह ने पुलिस को बताया कि बृहस्पतिवार को उसके पड़ोस के काश्तकार ने अपने खेत में पराली जला दी, जिससे उसके गन्ने के खेत में आग लग गई। जब तक आग पर काबू पाया जाता तब तक उसका आठ बीघा गन्ना जल गया, जिससे उसे भारी नुकसान हुआ है। आग से गांव के ही वीरेंद्र, विशाल हसंी आदि का भी नुकसान हुआ है। पीड़ित ने रिपोर्ट दर्ज कराए जाने की मांग की है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।