शाहजहांपुर। सर्जिकल मेडिकल उपकरण समेत चिकित्सा संबंधी कई अन्य उत्पाद बनाने वाली हथौड़ा चौराहा सीतापुर मार्ग स्थित जी सर्जिवेयर लिमिटेड पर बुधवार को आयकर विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। बरेली, हरदोई, सीतापुर और शाहजहांपुर की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई आयकर के अनुच्छेद 133ए के तहत की है। रेती स्थित दूसरी यूनिट पर भी आयकर विभाग के अधिकारियों और एक्सपर्ट की टीमें पड़ताल में जुटी हुई हैं। आयकर विभाग ने कार्रवाई को पूरी तरह से गोपनीय रखा है। बृहस्पतिवार को विभाग की ओर से इस संबंध में अधिकारिक जानकारी देने की बात कही जा रही है।
सीतापुर रोड पर हथौड़ा बुजुर्ग और रेती में जी सर्जिवेयर की दो यूनिट हैं। दोनों यूनिट में सर्जिकल मेडिकल, पोलियो संबंधी सर्जिकल, ऑपरेशन आदि से संबंधी उत्पाद बनाए जाते हैं। जी सर्जिवेयर की सप्लाई अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर है। बुधवार को आयकर विभाग की बरेली, हरदोई, सीतापुर और शाहजहांपुर की संयुक्त टीमों ने भारी पुलिस फोर्स और पीएसी के साथ दोनों यूनिट पर छापामारी की। दोपहर के वक्त ही गई छापामारी को आयकर विभाग ने पूरी तरह से गोपनीय रखा। सूत्रों ने बताया कि दोनों यूनिट का रिकार्ड, स्टॉक, खरीद-बिक्री, उत्पादन के साथ निर्यात की पड़ताल की जा रही है। बुधवार देर रात तक आयकर अधिकारियों के साथ एक्सपर्ट की टीमें पड़ताल में जुटी रहीं। आयकर अधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि फिलहाल जांच चल रही है। इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह सकते।
जी सर्जिवेयर की हथौड़ा और रेती यूनिटों पर आयकर की धारा 133ए के तहत जांच की जा रही है। बरेली, हरदोई, सीतापुर और शाहजहांपुर की संयुक्त टीमों ने दोनों यूनिट पर एक साथ कार्रवाई की है। फिलहाल रिकार्ड, स्टॉक, खरीद-बिक्री, सप्लाई आदि की पड़ताल की जा रही है। कंपनी की कुल घोषित संपत्ति और पड़ताल के सामने आने वाली संपत्ति का मिलान करने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। संपत्ति का सर्वे पूरा होने में अभी कुछ समय लगेगा।
वीएस बिष्ट, आयकर अधिकारी
एक सप्ताह में आयकर विभाग की दूसरी बड़ी कार्रवाई
शाहजहांपुर। आयकर विभाग की संयुक्त टीम ने एक सप्ताह के भीतर जिले में दूसरी बड़ी कार्रवाई की है। 21 फरवरी को सदर बाजार के बहादुरगंज में पुनीत और चौक इलाके में नवनीत ज्वैलर्स के यहां आयकर विभाग की टीमों ने कार्रवाई की थी। इस दौरान पुनीत ज्वैलर्स के यहां घोषित संपत्ति से ढाई करोड़ अधिक की संपत्ति सामने आई थी। आयकर विभाग ने ज्वैलर्स को सम्मन दिया था। ज्वैलर्स ने ढाई करोड़ की ज्वैलरी समेत अन्य संपत्ति की बात स्वीकार की। इसके साथ ही आयकर विभाग को एडवांस टैक्स के रूप में 80 लाख रुपये के भुगतान की बात कही थी।