दून इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल में बनाए जा रहे 2400 वर्ग फुट के हॉल का निर्माणाधीन लिंटर ढहने के मामले में प्रथम दृष्टया आर्किटेक्ट और इंजीनियर की लापरवाही सामने आई है। 60 गुणा 40 फुट का लिंटर डालने के लिए न तो मजबूत शटरिंग की गई थी और न ही लिंटर के बीच में कोई सपोर्ट दी गई थी। मंगलवार को पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर्स की टीम ने मौका मुआयना किया तो यह बात सामने आई। इतना ही नहीं जिस बड़े एरिया में लिंटर डाला जा रहा था उसकी दीवारें और पिलर भी मजबूत नहीं थे। निर्माण आर्किटेक्ट की निगरानी में होना था लेकिन वह भी वहां मौजूद नहीं था।
सोमवार को हुए इस हादसे में तीन मजदूरों की जान चली गई और 15 घायल हुए थे। कई मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका के चलते शाहजहांपुर से लखनऊ तक अफसर हरकत में रहे। सोमवार रात ही कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना शाहजहांपुर पहुंच गए। बरेली मंडल के कमिश्नर रणवीर प्रसाद और आईजी डीके ठाकुर ने भी यहां पहुंच कर मौका मुआयना किया। अमर उजाला ने सोमवार के अंक में ही 2400 वर्ग फुट एरिया के लिंटर के लिए बनाई गई कमजोर शटरिंग के साथ कोई सपोर्ट बीम न होने के तथ्य को उजागर किया। जेई विनियमित क्षेत्र रामवीर सिंह की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट में भी कमजोर शटरिंग की बात कही गई है। इधर, मंगलवार को पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर पीके मिश्रा ने टीम के साथ मौका मुआयना किया। जांच में प्रथम दृष्टया पाया गया है कि आर्किटेक्ट और इंजीनियर से बड़ी चूक हुई। 60 गुणा 40 फुट के लिंटर को ऐसे ही बांस-बल्लियों पर रोकने की कोशिश की गई। इससे यह दर्दनाक हादसा हुआ। इतना ही नहीं लोनिवि की जांच टीम ने यह भी पाया है कि जिन पिलर पर लिंटर डाला जा रहा था वे भी पूरी तरह से पक कर मजबूत नहीं हुए थे। विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इंजीनियर पीके मिश्रा के मुताबिक प्रथम दृष्टया आर्किटेक्ट और इंजीनियर की लापरवाही सामने आई है। हादसा कमजोर शटरिंग और बिना बीम के लिंटर की वजह से हुआ है।
प्रथम दृष्टया जांच में साफ हो गया है कि आर्किटेक्ट और इंजीनियर से चूक हुई है। शटरिंग मजबूत नहीं थी। विशाल लिंटर के लाइव लोड को झेल पाने के लिए बीम की जरूरत थी। पहले से बीम भी नहीं लगाए गए। आर्किटेक्ट और इंजीनियर को शटरिंग के दौरान मौजूद रहना चाहिए था वह भी नहीं थे, फिलहाल जांच जारी है। प्रथम दृष्टया इतना दाबे के साथ कहा जा सकता है कि अंडर कंट्रक्शन बिल्डिंग में मैन्यूफैक्चरिंग डिफेक्ट है। - आरके पिथौनिया, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी, प्रांतीय खंड