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पुलिस ने खोले पप्पू की हत्या करने वालों के नाम

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पुवायां (शाहजहांपुर)। पुलिस ने डेढ़ साल पहले हुए पप्पू हत्याकांड का खुलासा कर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनका चालान कर दिया। दर असल गोली लगने के बाद उधर से गुजर रहे रतनपुर कुंडा के कमलेश को पप्पू ने बताया था कि प्रधान और मिथलेश ने उसे गोली मारी है। कमलेश ने धमकी मिलने के कारण इस बात को दबाए रखा। अब जब सच्चाई सामने आई तो पुलिस एक्शन में आयी।
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कोतवाली प्रभारी अशोक पाल ने बताया कि गांव मजीदापुर के पप्पू श्रीवास्तव की 18 दिसंबर 2015 को जब गोली मारी गई थी, जिससे उसकी मौत हो गई थी। बुधवार को पप्पू की हत्या के आरोपी प्रधान पुत्र वीरेंद्र और मिथलेश को जेल भेजने से पहले पहले यह जानकारी दी। कोतवाल ने बताया कि हत्या के अगले दिन कमलेश ने कुछ लोगों को पप्पू के बयान की जानकारी दी तो बात आरोपियों तक जा पहुंची। आरोपियों ने कमलेश के पास पहुंचकर जुबान खोलने पर जान से मारने की धमकी दी थी, जिस कारण कमलेश ने मामले में चुप रहना ही उचित समझा। पूर्व में मुकदमे की विवेचना के दौरान कमलेश का बयान भी लिया गया, लेकिन धमकी के डर से कमलेश ने हत्यारों के नाम नहीं बताए थे।
नए विवेचक को इस बारे में जानकारी मिली तो वह कमलेश के घर गए, लेकिन वह नहीं मिला। जिस पर कमलेश की पत्नी को नोटिस देकर कमलेश को बयान के लिए थाने बुलाया गया था। 25 जून को कमलेश से विश्वास में लेकर बयान लिए गए तो उसने पप्पू के मृत्यु पूर्व बयान के आधार पर पुलिस को आरोपियों के बारे में जानकारी दी। इसके बाद आरोपियों के घर दबिश दी गई, लेकिन कोई घर नहीं मिला। मुखबिर की सूचना पर मंगलवार की शाम दोनों को बंडा रोड पर नाहिल मोड़ के पास से पकड़ लिया गया। बुधवार को दोनों का चलान कर दिया।
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घटना के बाद खेत में फेंक दिए थे तमंचे
पप्पू की हत्या के बाद वीरेंद्र और मिथलेश मौके से बड़ागांव की ओर भाग गए थे। दोनों ने अपने तमंचे खेतों में फेंक दिए थे। पुलिस के अनुसार पूछताछ में दोनों ने बताया कि दोनों ने पप्पू को दो-दो गोलियां मारी थी। घटना स्थल पर भीड़ जमा होने के बाद दोनों फिर से मौके पर पहुंच गए और पुलिस कार्रवाई की जानकारी लेते रहे।
पप्पू का फूफा है मिथलेश
पप्पू की हत्या में जेल गया मिथलेश उसका सगा फूफा है। पुवायां में शाहजहांपुर रोड पर पप्पू की दुकान के पास ही मिथलेश की भी हेयर कटिंग की दुकान है। पप्पू के मधुर व्यवहार के कारण उसकी दुकान ज्यादा चलती थी। जिस कारण मिथलेश नाराज रहता था। उधर, वीरेंद्र ने पुलिस को बताया कि चुनाव में पप्पू ने एक लाख रुपया भी उसे दिया था। चुनाव जीतने पर कोटा देने और प्रधानी में बची धनराशि में भी आधा रुपया देने की बात तय थी। जीत के बाद प्रधानी पप्पू चलाने लगा था गांव के लोग भी काम के लिए उसके पास जाते थे। इसी कारण वीरेंद्र ने उसे रास्ते से हटाने का प्लान बनाया। हत्या से एक दिन पूर्व 17 दिसंबर को भी घेराबंदी की थी, लेकिन पप्पू देर से घर गया। इस कारण फिर से घेराबंदी कर हत्या कर दी गई।
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