शाहजहांपुर। नामी चिकित्सक डॉ. विजय पाठक के यहां सुधीर यादव करीब पांच साल से नौकरी कर रहा था। इतना ही नहीं वह डॉक्टर और उनके परिवार के बारे में काफी जानकारियां रखता था। उनकी आर्थिक स्थिति के बारे में बखूबी जानता था। एक महीने पहले उसने कुछ जरूरी काम निपटाने की बात कही थी। इसके बाद नौकरी पर कभी-कभार ही आता था। डॉक्टर के पास रंगदारी की कॉल आई तो उनको पहले कुछ समझ में नहीं आया। बेटे को फोन किया उसका हाल जाना और सतर्क रहने को कह दिया।
नामचीन होने की वजह से डॉ. विजय पाठक किसी तरह का खतरा लेना नहीं चाहते थे। उन्होंने चुपचाप मामले में तहरीर दी। पुलिस ने भी रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पूरे मामले को गोपनीय रखा। इस बीच मोबाइल नंबर को भी सर्विलांस पर लगा दिया गया। सुधीर यादव जानता था कि डॉक्टर से आसानी से वसूली की जा सकती है। इस बीच उसने डॉक्टर को दोबारा फोन किया। डॉक्टर ने फोन रिसीव ही नहीं किया। कई कॉल के बाद भी फोन रिसीव नहीं हुआ तो सुधीर यादव ने डॉक्टर की पत्नी के नंबर पर कॉल कर दी। जिस नंबर पर उसने कॉल की वह नंबर उनका पर्सनल नंबर था। परिवार और एक दो खाश लोगों के अलावा यह नंबर किसी अन्य व्यक्ति के पास नहीं था। ऐसे में डॉक्टर का माथा भी ठनका। वह समझ गए कि साजिश में जरूर कोई करीबी शामिल है। पुलिस ने भी इस बिंदु पर पड़ताल शुरू कर दी। ऐसे में पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगा। इंस्पेक्टर राजीव शर्मा का कहना है कि अगर मामले को मीडिया में सार्वजनिक किया जाता तो आरोपी सतर्क हो जाते और उनकी गिरफ्तारी में देरी होती।