ददरौल/कांट (शाहजहांपुर)। मेड़ को लेकर एक माह पहले हए झगड़े की रंजिश में युवक की गोली मारकर हत्या दी गई। मृतक की मां की ओर से चार लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। वारदात रविवार रात कांट थाने के गांव गुर्रा भमौली में हुई। नामजदों में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। अभी हत्या में प्रयुक्त तमंचा बरामद नहीं हो सका है। मृतक अविवाहित था। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है।
कांट थाने के गांव गुर्रा भमौली के 22 वर्षीय योगेंद्र पुत्र पातीराम का करीब एक महीने पहले अपने ही गांव के ख्याली और सुआलाल से मेड़ को लेकर झगड़ा हो गया था। इनके बीच जमीन को लेकर पहले से भी रंजिश थी। मेड़ को लेकर हुए झगड़े ने रंजिश को और बढ़ा दिया। रविवार रात योगेंद्र अपने घर के बाहर घेर में चारपाई पर सो रहा था। उसका छोटा भाई धीरेंद्र भी वहीं सो रहा था। योगेंद्र की मां वेदवती का आरोप है कि रात करीब 1:30 बजे ख्याली पुत्र सालिगराम, जय सिंह पुत्र सालिगराम, पवन पुत्र इंद्रपाल और सुआलाल पुत्र उमराय घेर में जा पहुंचे। इनमे से तीन लोगों ने योगेंद्र के हाथ-पांव पकड़े और ख्याली ने उसके सिर में गोली मार दी। फायर की आवाज होने पर धीरेंद्र जाग गया। वह भी घर के बाहर आ गई। ख्याली के हाथ में तमंचा और बाकी तीनों के हाथों में लाठी-डंडे थे। इसके बाद आरोपी वहां से भाग गए। वेदवती का आरोप है कि मेड़ की रंजिश में बेटे की हत्या कर गई है। एसओ उपेंद्र सिंह ने बताया कि चार लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। उन्होंने बताया कि ख्याली को छोड़ शेष तीनों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं।
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मेड़ के विवाद में युवक की गोली मारकर हत्या की गई है। मामले में रिपोर्ट दर्ज कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। तफ्तीश की जा रही है। कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
दिनेश त्रिपाठी, एसपी सिटी
दिल्ली में करता था काम, योगेंद्र को मौत खींच लाई गांव
ददरौल/कांट(शाहजहांपुर)। चार भाइयों में दूसरे नंबर का योगेंद्र दिल्ली में रहकर अपने बड़े भाई सुनील के साथ नौकरी करता था। छह-सात महीने पहले ही वह दिल्ली से गांव लौटा था। यहां अपने छोटे भाइयों धीरेंद्र और धर्मेंद्र के साथ खेती-बाड़ी का काम देखने लगा था। योगेंद्र की हत्या के बाद गांव के लोग कह रहे हैं कि शायद दिल्ली से उसे मौत यहां खींच लाई।
गर्रा और खन्नौत नदियों में आने वाली बाढ़ का दंश झेलने वाला कांट का गांव गुर्रा भमौली ज्यादा संपन्न नहीं है। यहां के काफी लोग दूसरे प्रांतों या जिलों में नौकरी करते हैं। कई साल पहले गांव का काफी हिस्सा बाढ़ के चलते नदियों में समा गया था। इसके बाद गांव की रिहायश एक तरह से तितर-बितर हो गई। यहां मकान काफी दूर-दूर बने हैं। योगेंद्र के पिता की मौत करीब 14 साल पहले हो चुकी है। इसके बाद से चारों भाई मिलकर घर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। योगेंद्र की हत्या के बाद परिवार में कोहराम है। योगेंद्र ने गांव में खेती-बाड़ी और पशुपालन का काम देखना शुरू किया उसके बाद से ही वह कुछ लोगों की आंखों में खटकने लगा था।
शादी के लिए भी चल रही थी बात
कांट। चार भाइयों में योगेंद्र दूसरे नंबर का है। बड़े भाई सुनील की शादी हो चुकी है। योगेंद्र की शादी के लिए भी बात चल रही थी। परिवार वालों की मानें तो अक्सर लड़की पक्ष के लोग घर आया करते थे। योगेंद्र की शादी की बात करते थे, लेकिन योगेंद्र अभी कुछ दिन रुकने के लिए कह देता था। पिछले दिनों भी एक पड़ोसी गांव से योगेंद्र के लिए रिश्ता आया था। जवान बेटे की हत्या के बाद मां वेदवती बदहवास हैं। भाइयों का भी रो-रो कर बुरा हाल है।