तिलहर (शाहजहांपुर)। विकलांग और गर्भवती यास्मीन जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। वह दो माह से बरेली से लेकर लखनऊ तक के चक्कर लगा चुकी है, लेकिन उसे कोई आशियाना नहीं मिला है। दो दिन पहले उसे फिर तिलहर अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर शुक्रवार को उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
यहां बता दें कि दो माह पहले तिलहर से जैतीपुर जाने वाले मार्ग पर गांव मंसूरपुर गोटिया के समीप सड़क के किनारे खंती में एक मानसिक मंदित महिला को पड़े हुए देखा गया था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने उसको तिलहर के सरकारी अस्पताल पहुंचाया था, जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज किया। गर्भवती महिला बताई गई महिला ने अपना नाम यास्मीन बताया। अधिक पूछने पर उसने अजमेर राजस्थान का नाम भी लिया। उस समय पुलिस ने अजमेर पुलिस से संपर्क करके इसके बारे में पता करना चाहा, लेकिन अजमेर पुलिस ने यास्मीन के बारे में कोई भी जानकारी नहीं दी। बाद में यास्मीन को तत्कालीन एसडीएम ने नारी निकेतन बरेली भेज दिया।
बताते हैं की नारी निकेतन बरेली वालों ने इस महिला को इलाज के लिए केजीएमसी लखनऊ भेजा। केजीएमसी लखनऊ ने इलाज देने के बाद स्वस्थ होने पर इस महिला को वापस तिलहर भेज दिया। चूंकि वह तिलहर में पाई गई थी इसलिए पांच जुलाई को लखनऊ से तिलहर पहुंची। यहां पर एसडीएम मोइन उल इस्लाम ने थाना पुलिस को महिला नारी निकेतन बरेली भेजने के आदेश दिए। एसडीएम के आदेश पर पुलिस यास्मीन को लेकर जब बरेली नारी निकेतन पहुंची, तो महिला को यह कहकर लेने से इंकार कर दिया कि वह विकलांग है। उनके यहां विकलांग नहीं लिए जाते। इसके लिए अलग से विकलांग नारी निकेतन भेजा जाए। पुलिस यास्मीन को 5 जुलाई की शाम बरेली से तिलहर लाई गई।
बरेली से तिलहर वापस आने पर एसडीएम ने 5 जुलाई की शाम यास्मीन को तिलहर अस्पताल में इलाज व देखभाल के लिए के लिए भर्ती करा दिया। उसकी सुरक्षा में दो महिला पुलिसकर्मी अस्पताल में तैनात कर दी गई। यास्मीन ने खाना पीना छोड़ दिया, जिससे उसके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आ गई क्योंकि उसके पेट में डॉक्टरों के मुताबिक लगभग 5 माह का गर्भ भी है इसलिए उसके स्वास्थ्य में गिरावट को देखते हुए शुक्रवार को दोपहर बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। एसडीएम मोइन उल इस्लाम ने बताया कि यास्मीन कुछ स्वस्थ हो जाए तब उसे विकलांग नारी निकेतन भेजने की व्यवस्था की जाएगी।
विडंबना है नारी सशक्तिकरण के इस दौर में एक मानसिक कमजोर विकलांग महिला पिछले दो माह से बरेली से लेकर लखनऊ तक के चक्कर लगा चुकी है। इस विकलांग महिला के साथ किसी दरिंदे ने जो कृत्य किया, जिससे वह वर्तमान में पांच माह की गर्भवती बताई जा रही है। उसकी जिंदगी को बद से बदतर बना दिया। वह इन दिनों जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है।